काम के दोनों हैं पर दोनों हैं ऐ यार अबस
काम के दोनों हैं पर दोनों हैं ऐ यार अबस
कुफ़्र में सुब्हा अबस दीन में ज़ुन्नार अबस
लड़े मरते हैं यूँ ही काफ़िर-ओ-दींदार अबस
उन की रंजिश है अबस उन की है तकरार अबस
पगड़ी बन जाये न मय-ख़्वारों की दस्तार-ए-शरीफ़
मोहतसिब करते हो मय-नोशों से तकरार अबस
न कमर उस की नज़र आए साबित हो दहन
गुफ़्तुगू उस में अबस उस में है तकरार अबस
बाग़-ए-दुनिया में जो आए तो यही फल पाया
हो गए हम से सुबुक-दोश गिराँ-बार अबस
है तिरे ख़ून-ए-जिगर से नहीं कम बादः-ए-नाब
तू न हो साथ तो है सैर-ए-चमन यार अबस
दाम-ए-गेसू से रिहाई हो तो पहुँचूँ तुझ तक
फ़िक्र मेरी है मुझे हल्क़ः-ए-ज़ुन्नार अबस
एक दिन भी न मिरे दिल के फफूले टूटे
नोक की लेती है मिज़्गाँ सिफ़त-ए-ख़ार अबस
क़त्ल-ए-उश्शाक़ को क्या जुम्बिश-ए-अबरू कम है
दस्त-ए-नाज़ुक में है ये नीमचः ऐ यार अबस
रहमत-ए-साक़ी-ए-कौसर है शफ़ाअत के लिए
मय-कशो छोड़ते हो ख़ान:-ए-ख़ुमार अबस
हामी उन के हैं शफ़ी-ए-दो-जहाँ ऐ 'अकबर'
डरते हैं मालिक-ए-दोज़ख़ से गुनहगार अबस
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