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सरमद होली खेल रहा है सरमद ही के संग

नईम सरमद

सरमद होली खेल रहा है सरमद ही के संग

नईम सरमद

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    सरमद होली खेल रहा है सरमद ही के संग

    सरमद ही के गाल गुलाबी सरमद ही का रंग

    अपनी आमद पर अपने को ख़ूब सजाया री

    आप ही अपना रूप निहारा आप ही हो गई दंग

    अपने इश्क़ में मारे मारे फिर रहे थे, यानी

    अपने जैसा रूप बनाया अपने जैसा ढंग

    देख अज़ान-ए-फ़ज्र से लड़ती शंख की ये आवाज़

    जैसे दो सखियाँ करती हों इक दूजे को तंग

    मौला जियूंदे वस्दे रहन ऐह सुच्चे पीर फ़क़ीर

    मौला ओहदी ख़ैर होवे जिन्हूं इश्क़ दा चढ़या रंग

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