दिला ग़ाफ़िल न हो एक दम कि दुनिया छोड़ जाना है
रोचक तथ्य
مندرجہ بالا کلام پنجاب کے جید عالم مولانا غلام رسول قلعہ میہان سنگھ ضلع گوجرانوالہ کا لکھا ہوا ہے، اس کلام میں انہوں نے فکرِ آخرت اور عشقِ رسول ﷺ کے حوالے سے بڑے درد مندانہ اور اثر انگیز اشعار تحریر کیے ہیں۔
दिला ग़ाफ़िल न हो एक दम कि दुनिया छोड़ जाना है
बग़ीचे छोड़ के ख़ाली ज़मीं अंदर समाना है
तेरा नाज़ुक बदन भाई जो लेटे सेज फूलों पर
होवेगा एक दिन मुर्दार कर माने ये खाना है
अजल के रोज़ को कर याद कर सामान चलने का
ज़मीं के फ़र्श पर सोना ईंटों का सिरहाना है
न बेली हो सके भाई न बेटा बाप ते माई
तु क्या फिरता है सौदाई 'अमल ने काम आना है
जहाँ के शग़्ल में शाग़ल ख़ुदा की याद से ग़ाफ़िल
करें दुनिया जो ये दा'वा मेरा दाइम ठिकाना है
ग़लत फ़हमीद है तेरी नहीं आराम इस पल में
मुसाफ़िर बे-वतन है तू कहाँ तेरा ठिकाना है
फ़रिश्ता रोज़ करता है मुनादी चार खूँटों पर
मोहल्लाँ ऊँचियाँ वाले तेरा गोरें ठिकाना है
कहाँ वो माह-कन’आनी कहाँ तख़्त-ए-सुलैमान
गए सब छोड़ ये फ़ानी अगर नादान-ओ-दाना है
'अज़ीज़ याद कर वो दिन जो मलक-उल-मौत आवेगा
न जावे साथ तेरे को अकेला तें ने जाना है
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