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मैं ढूँडूँ कहाँ तुझ को ऐ यार-ए-जानी मेरे नफ़्स-ओ-क़ालिब में और जाँ में तू है

अज्ञात

मैं ढूँडूँ कहाँ तुझ को ऐ यार-ए-जानी मेरे नफ़्स-ओ-क़ालिब में और जाँ में तू है

अज्ञात

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    मैं ढूँडूँ कहाँ तुझ को यार-ए-जानी मेरे नफ़्स-ओ-क़ालिब में और जाँ में तू है

    नहीं आता क्यूँ मेरी आँखों के आगे मेरे चार 'उंसुर के अरकाँ में तू है

    ख़त्त-ओ-ख़ाल-ओ-हुस्न-ओ-जमाल-ओ-अदाएँ करिश्मा है तू और अंदाज़ है तू

    फ़िराक़-ओ-ग़म-ओ-रंज-ए-हिरमाँ में तू है तू जल्वा-गर-ए-ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ में तू है

    तजल्ली-ओ-अनवार-ए-असरार-ए-पिन्हाँ तिरे हुस्न-ए-जाँ-सोज़ का शो'बदा है

    तु ख़ुद 'इश्क़-ओ-मा'शूक़ हो कर के अपना नुमायाँ मेरी चश्म-ए-हैराँ में तू है

    जहाँ मैं ने ढूँडा वहीं तुझ को पाया तिरा जल्वा आँखों में मेरी समाया

    ख़स-ओ-ख़ार-ओ-अश्जार-ओ-गुलज़ार-ओ-बुलबुल ख़िज़ाँ में बहार-ए-गुलिस्ताँ में तू है

    ख़ुद अपना तो लैला बना ख़ुद ही शीरीं तो ख़ुद अपना ख़ुसरव है बा-जाह-ओ-तमकीं

    तु है आबला पा-ए-मजनूँ ख़ुद अपना जो देखा तो ख़ुद ही बयाबान में तू है

    अज़ल तू अबद तू यहाँ तू वहाँ तू मकीं तू मकाँ तू ज़मीं तू ज़माँ तू

    'अयाँ तू निहाँ तू ज़बाँ तू बयाँ तू मेरे लब पे और चश्म-ए-गिर्यां में तू है

    फ़लक में मलक में क़मर में गुहर में हजर में शजर में नज़र में बसर में

    बुहूर-ओ-जिबाल-ओ-यम-ओ-अब्र-ए-नीसाँ दुर-ओ-ला'ल-ओ-याक़ूत-ए-मरजाँ में तू है

    कहाँ हूँ किधर हूँ मैं हूँ कौन क्या था और अब हूँ तो क्या हूँ कहाँ हूँ बताओ

    जो कुछ है तू तो है मेरे रू-ब-रू है मेरी जाँ और दिल के ऐवान में तू है

    नज़र में गुज़र में जिगर में शरर में शजर में असर में बशर में समर में

    अगर में मगर में सफ़र में हज़र में तू है और नहीं फिर हर इक शान में तू है

    मेरे यार ग़म-ख़्वार दिलदार जानी नहीं तेरा दोनों जहाँ में है सानी

    सुने दर्द की कौन मेरे कहानी ग़म-ओ-ग़ुस्सा-ओ-रंज-ए-पिन्हाँ में तू है

    'ख़लील'-ए-जिगर-ख़स्ता अफ़गार ना-चार हर बार कह तू मोहम्मद मोहम्मद

    निकल हिन्द से चल मदीना को अब तू यहाँ क्यूँ पड़ा दार-ए-'इस्याँ में तू है

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