वो ख़म-ए-अबरू का'बा-ए-जाँ है सज्दा-गह-ए-'उश्शाक़-ए-जहाँ है
वो ख़म-ए-अबरू का'बा-ए-जाँ है सज्दा-गह-ए-'उश्शाक़-ए-जहाँ है
आयतुल्लाह जौहरी
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वो ख़म-ए-अबरू का'बा-ए-जाँ है सज्दा-गह-ए-'उश्शाक़-ए-जहाँ है
ला’ल लब उस का क़ुव्वत-ए-रवाँ है सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
सब नबियों में मोहम्मद नामी अदब से लूँ मैं नाम-ए-गिरामी
काम बने दूर हो नाकामी सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
क्या हुए जो दर्स में पाऊँ ख़ाक-ए-क़दम आँखों से लगाऊँ
सूरत देख निसार हो जाऊँ सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
क्या जीना ये तुम बिन जीना इस दर्द से चाक हो सीना
हम से दूर पड़ा है मदीना सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
हिन्द की ख़ाक से दूर 'अरब है तन को ताब-ओ-ताक़त कब है
लेकिन दिल दीदार-तलब है सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
क्या हुए जो नसीब हो यावर देखूँ हुस्न-ओ-जमाल-ए-पयम्मबर
होवे दिल-ओ-दिमाग़ मो'अत्तर सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
हक़ ने तुम्हें फ़रमाया ये इन्ना-आ’तैनाकल-कौसर
मुझ को दीजियो जाम ब-महशर सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
'जौहर' या गर पुर-ज़-गुनाह है मू-ए-सफ़ेद-ओ-रू-ए-सियाह है
या हज़रत ये शफ़ा'अत ख़्वाह है सल्लल्लाहु-'अलैहे-वसल्लम
- पुस्तक : Al-Mujeeb, Phulwari Sharif (पृष्ठ 14)
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