मन नाचत है मन गावत है तोरा जन्म दिवस जब आवत है
मन नाचत है मन गावत है तोरा जन्म दिवस जब आवत है
तोरे नाम की बंसी सुन-सुन कर मोरे मन का कँवल खिल जावत है
जब कोई कोइलिया अमवा पर तोरी प्रेम कविता गावत है
तोरे प्रेम का मीठा-मीठा रस मन आँगन में बरसावत है
तोरी बंसी बाजत है मन में तोरे गीत हैं गलियन गलियन में
हर तान अग्नी बन जावत है मोरा तन-मन सब जल जावत है
वो हमरे काज बनाने को वो हमरे भाग जगाने को
आकाश से धरती धरती से आकाश पे जावत आवत है
वो मध-भरे नैन वो चन्द्र-बदन संसार बना जिन के कारण
इस नूर मुकुट के दर्शन से सूरज की किरन शरमावत है
बाँटे हर दुखियारे का दुख जो नाम है दुखिया मन का सुख
पग राखे वो जिस धरती पर माटी सोना बन जावत है
जो लाज गए की लाज रखे मंगतों के सर पर ताज रखे
वही ज्ञान ध्यान 'अदीब' मोरा वही मोरा धरम कहलावत है
- पुस्तक : महानामा जाम-ए-इरफ़ान, हरिपुर (पृष्ठ 17)
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