मुश्किल टालो शाह-ए-उमम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम

मुश्किल टालो शाह-ए-उमम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
ग़ुलाम मोईनुद्दीन गिलानी
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मुश्किल टालो शाह-ए-उमम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
करम तुम्हारा 'आम है जहाँ पे मेहरबान हो तुम
करम की भीक दो हमें करीमा बे-कसाँ हो तुम
मुहताजों का रख लो भ्रम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
तुम्हारे दर से या नबी कहाँ फ़क़ीर जाएँगे
तुम्ही से लो लगाई है तुम्ही से भीक पाएँगे
मँगते हैं उस दर के हम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
इधर भी शाह-ए-मुर्सली कोई इशारा चाहिए
हबीब-ए-किब्रिया करम तुम्हारा चाहिए
कब तक झेलें रंज-ओ-अलम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
जमाल-ए-हक़-नुमा हो तुम ये सब तुम्हारा नूर है
तुम्हारे फ़ैज़-ए-'आम का हर जगह ज़ुहूर है
हम दुखियों के टालो ग़म कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
गिरे हैं मुश्किलों में हम बड़ा कठिन मक़ाम है
हमारे लब पे मुस्तफ़ा फ़क़त तुम्हारा नाम है
हर मँगते की आँख है नम कर दो आक़ा नज़र-ए-करम
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