Font by Mehr Nastaliq Web
Sufinama

कुल अंबिया से अफ़ज़ल 'आली-मक़ाम हैं वो

पुरनम इलाहाबादी

कुल अंबिया से अफ़ज़ल 'आली-मक़ाम हैं वो

पुरनम इलाहाबादी

MORE BYपुरनम इलाहाबादी

    कुल अंबिया से अफ़ज़ल 'आली-मक़ाम हैं वो

    अल्लाह भेजता है जिस पर सलाम हैं वो

    अक़्सा में की इमामत सारे पयम्बरों की

    सारे पयम्बरों के बे-शक इमाम है वो

    नबी-ए-सय्यद-उल-अम्बिया के बराबर

    पहले था कोई अब है होगा

    मोहम्मद का सानी मोहम्मद का हम-सर

    पहले था कोई अब है होगा

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    रसूल और भी आए जहान में लेकिन

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    ताहा-ओ-यासीन मुज़म्मिल

    मर्कज़-ए-कुल और हुस्न-ए-मुकम्मल

    पहले था कोई अब है होगा

    नूर-ए-मुबीं हक़ के क़रीं

    फ़र्श-ए-मकीं हैं ’अर्श-ए-नशीं हैं

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    नूर-ए-मुनव्वर अव्वल-ओ-आख़िर

    रौशन-रौशन बातिन-ज़ाहिर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    रसूल-ए-मुज्तबा कहिए

    मोहम्मद मुस्तफ़ा कहिए

    ख़ुदा के बा'द बस वो हैं

    फिर उसके बा'द क्या कहिए

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    मोहम्मद का सानी मोहम्मद का हम-सर

    पहले था कोई अब है होगा

    अगर है तो इक ज़ात अल्लाह की है

    जो ज़ात-ए-मोहम्मद से 'आला है वर्ना

    मोहम्मद से 'आला मोहम्मद से बढ़ कर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    जिसे हक़ ने बुलवाया 'अर्श-ए-'उला पर

    हुआ फ़ज़्ल-ए-हक़ से जो मेहमान-ए-दावर

    ख़ुदा की ख़ुदाई में ऐसा पयम्बर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    ज़ुलेख़ा थीं जिस पे फ़िदा जान-ओ-दिल से

    वो यूसुफ़ बड़े ख़ूबसूरत थे लेकिन

    रुख़-ए-मुस्तफ़ा से हसीं रू-ए-अनवर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    नबी सारे महबूब हैं किब्रिया के

    मगर ये भी सच है ब-जुज़ मुस्तफ़ा के

    हबीब-ए-ख़ुदा दोनों 'आलम का दिलबर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    बड़ाई मैं 'पुरनम' वो बा'द अज़ ख़ुदा हैं

    शह-ए-अम्बिया हैं शह-ए-दोसरा हैं

    बशर उन के रुत्बे का अल्लाहु-अकबर

    पहले था कोई अब है होगा

    थे रुत्बे में पहले पर आख़िर में आए

    बशर उन के रुत्बे पे क़ुर्बान जाए

    मोहम्मद सा अफ़ज़ल मोहम्मद सा आख़िर

    उन सा पहले था कोई अब है होगा

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए