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जहाँ में हर तरफ़ फैला उजाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

सय्यद अमजद हुसैन

जहाँ में हर तरफ़ फैला उजाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

सय्यद अमजद हुसैन

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    रोचक तथ्य

    منقبت در شان غوث پاک شیخ عبدالقادر جیلانی (بغداد-عراق)

    जहाँ में हर तरफ़ फैला उजाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    मिला रस्तों को भी रौशन इशारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    चमकता है फ़लक पर भी सितारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    रहेगा क़ाएम-ओ-दाएम उजाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जहाँ में हर तरफ़ चलता है सिक्का ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    फ़लक तक गूँजता रहता है ना'रा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जो 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का मो'तबर रहबर बना कोई

    वो दरिया-ए-करम से है पियाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जो सदियों से जला करते थे ग़म की तेज़ लपटों में

    वो अब कहते हैं मिलता है सहारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    क़यामत तक रहेगा जल्वा उन की शान-ओ-'अज़मत का

    मिटा सकता नहीं कोई उजाला ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    क़लंदर भी वली भी 'आशिक़-ए-मौला सभी झुक कर

    बयाँ करते रहे जल्वा-आरा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जहाँ से लुट रही थी बख़्शिशें सब बे-हिसाब अब तक

    वहीं से मिल गया हम को ख़ज़ाना ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    अगर चाहो शफ़ा'अत हश्र में पक्की तो सुन लो तुम

    पकड़ लेना सदा दामन रज़ा का ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    मिरी ख़ुश-क़िस्मती देखो कि मुझ पर भी नज़र कर दी

    बना जो कुछ भी हूँ मैं बस है सदक़ा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    लहद में जब उतर जाऊँ तो सिरहाने पे लिख देना

    ग़ुलामी में मरा हूँ मैं ग़ुलामा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जो डूबे थे गुनाहों में उन्हें साहिल मिला आख़िर

    ख़ुदा ने दे दिया हम को सहारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    जहाँ वाले समझते हैं जिसे मुश्किल का हल कोई

    हक़ीक़त में वही तो है इशारा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    क़यामत तक रहेगा मेरे लब पर बस यही ना'रा

    निशान बंदगी है ये ग़ुलामा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

    मैं 'अमजद' हूँ ग़ुलाम उन का करम होता है हर लम्हा

    ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हूँ और ग़ुलामा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

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