ये शादी का मंज़र है क्या प्यारा-प्यारा
ये शादी का मंज़र है क्या प्यारा-प्यारा
मुबारक हो तुम को ख़ुशी का नज़ारा
ख़ुशी से चमकता है दूल्हा का चेहरा
मुबारक हो शादी मुबारक हो सेहरा
ये पैग़ाम देती हैं सेहरे की लड़ियाँ
ख़ुदा ने दिखाईं मसर्रत की घड़ियाँ
'अज़ीज़ों के दिल की कली खिल गई है
कि बाप और माँ को बहू मिल गई है
लुटाती है उल्फ़त ख़ुशी का ख़ज़ाना
बहारों ने छेड़ा है दिल-कश तराना
मिले हैं मुक़द्दर से क्या नेक दोनों
ख़ुदाया रहें 'उम्र-भर एक दोनों
इलाही उन्हें इस तरह शाद रखना
मोहब्बत से घर उन का आबाद रखना
सदा चमके दोनों की क़िस्मत का तारा
ये शादी का मंज़र है क्या प्यारा-प्यारा
कहो दोस्तों से हँसें और झूमें
निगाहों से दूल्हा के सेहरे को चूमें
महकने लगे प्यार के फूल हर सू
रची है दिलों में मोहब्बत की ख़ुश्बू
गुलों के लबों पर हँसी खेलती है
तमन्नाओं से ज़िंदगी खेलती है
है मौजूद 'इशरत का सामान पूरा
हुआ आज शादी का अरमान पूरा
खिली है दिलों में मसर्रत की कलियाँ
कि माँ-बाप भाई-बहन सब हैं शादाँ
मिला है ये रिश्ता भी क्या प्यारा-प्यारा
मुबारक हो तुम को ख़ुशी का नज़ारा
ये शादी का मंज़र है क्या प्यारा प्यारा
मुबारक हो शादी ये दूल्हा-दुल्हन को
मुबारक हो दोनों के भाई-बहन को
ख़ुशी की घड़ी है ख़ुशी का समाँ है
दिलों में मोहब्बत का 'आलम जवाँ है
हैं मसरूर इस वक़्त दूल्हा मियाँ भी
यही रंग है अब दुल्हन के यहाँ भी
दिखाया है दोनों को ये दिन ख़ुदा ने
कि बजते हैं दोनों के घर शादियाने
घराने पे उन के ये लुत्फ़-ए-ख़ुदा है
ख़ुदा से ये 'अनवर' हमारी दु'आ है
बनें दोनों इक दूसरे का सहारा
ये शादी का मंज़र है क्या प्यारा-प्यारा
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