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ओ नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

अमजद हैदराबादी

ओ नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

अमजद हैदराबादी

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    मह-ए-यसरिब रसूल-ए-हाशमी बाँके जवाँ

    क्या ढली हैं सहर के साँचे में तेरी पुतलियाँ

    पार हो जाती है दिल के तीर-ए-मिज़्गाँ की सनाँ

    तेरी चश्म-ए-मस्त से बेहोश है सारा जहाँ

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    छा गया सारे जहाँ में रहमत-ए-हक़ का सहाब

    तेरे छींटों ने बुझाया बू-लहब का इल्तिहाब

    तेरी आमद से हुए 'आलम में क्या क्या इंक़िलाब

    इक नज़र में सैकड़ों को कर दिया मस्त-ओ-ख़राब

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    जाम-ए-मय मस्तों को तूने साक़ी-ए-कौसर दिया

    मय-कशान-ए-बादा-ए-तौहीद को साग़र दिया

    सारा मय-ख़ाना शराब-ए-मा'रिफ़त से भर दिया

    चश्म-ए-बद-दूर इक नज़र में तू ने क्या कुछ कर दिया

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    तेरी ख़ुश्बू हर तरफ़ बाद-ए-सबा फैला गई

    सोख़ता जानों के दिल में आग से भड़का गई

    दिल-रुबायाना अदा-ए-नाज़ सब को भा गई

    एक ’आलम को तिरी तेग़-ए-नज़र तड़पा गई

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    फ़ित्ने पैदा करती है 'आलम में चश्म-ए-पुर-फ़ितन

    कैफ़ से जिस के नशा है होश वालों का हिरन

    क्यूँ क़दमों पर गिरें तेरे तड़प कर मर्द-ओ-ज़न

    कह रही है तेरी चश्म-ए-मस्त ख़र्रू-सुज्जदन

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    मुर्दे जी उठते हैं चश्म-ए-मस्त के अंदाज़ से

    पुतलियाँ दोनों भरी हैं सहर और ए'जाज़ से

    बिजलियाँ गिरती हैं दिल पर दीदा-ए-तन्नाज़ से

    किस क़दर पामाल हैं तेरी निगाह-ए-नाज़ से

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    जल्वा-फ़र्मा शक्ल-ए-अहमद में हुआ नूर-ए-अहद

    कौन ला सकता है ताब जल्वा-ए-हुस्न-ए-अबद

    या-ग़ियासुल-मुस्तग़सीन अल-ग़ियासो-वल-मदद

    चश्म-ए-फ़त्ताँ ने किसी की ले लिया होश-ओ-ख़िरद

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    चश्म-ए-अफ़सूँ-गर के अफ़्सूँ की ’अजब तासीर है

    कोई गिर्यां कोई महव-ए-नाला-ए-शब-गीर है

    तीर-ए-मिज़्गाँ का कोई बिस्मिल कोई नख़चीर है

    ख़र्र-ए-मूसा की जहाँ में हर तरफ़ तस्वीर है

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

    तेरी आँखों में लगा है कुहल-ए-मा-ज़ाग़ल-बसर

    मैं हूँ उन आँखों के क़ुर्बां हाँ इधर भी इक नज़र

    क्या बताऊँ हाय उन नीची निगाहों का असर

    ‘अमजद’-ए-शैदा चु जामी तीर-ए-ख़ुर्दः दर जिगर

    नशीली आँख वाले कुछ तुझे भी होश है

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