बख़्त-यावर को कि ’अज़्म ख़ानः-ए-मौला कुनम
रोचक तथ्य
مخمس بر غزل عبدالرحمٰن جامیؔ۔
बख़्त-यावर को कि ’अज़्म ख़ानः-ए-मौला कुनम
चूँ ग़ुबार-ए-राह दर राहश सर-ए-शैदा कुनम
पर गुहर ज़ाब दो दीदः-ए-दामन-ए-सहरा कुनम
के बुवद या-रब कि रौ दर यसरिब-ए-ओ-बतहा कुनम
गह ब-मक्कः मंज़िल-ओ-गह दर मदीनः जा कुनम
बर दर आँ ख़ानः गर याबम ज़-बख्त-ए-ख़्वेश रह
चार सू गर्दिश ब-गिर्दम मिस्ल-ए-दौर-ए-मेहर-ओ-मह
दाइमा बर आस्ता-ए-ख़ानः सायम नासियः
बर कनार-ए-ज़मज़मः अज़ दिल बद-कशम सद ज़मज़मः
अज़ दो-चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ आँ ख़ानः रा दरिया कुनम
या हबीबुल्लाह ब-सू-ए-ख़ुद ब-ख़्वाँ ईं बंदः रा
या मुजीबुल्लाह इजाबत कुन बरा-ए-हक़ दु’आ
या नबी-अल्लाह ब-शिनो इल्तजा-ए-ईं गदा
या रसूलुल्लाह ब-सू-ए-ख़्वेश मा रा रहनुमा
ता ज़-फ़र्क़-ए-सर क़दम साज़म ज़-दीद: पा कुनम
बे-तु गर बाशम ब-फ़िरदौस-ए-बरीं बाशम ख़जिल
गर रवम दर बाग़-ए-बे-रू-ए-तु गर्दम मुज़्महिल
मी-नुमायद बे-रुख़त दर चश्म-ए-मन गुल मिस्ल-ए-गुल
आरज़ू-ए-जन्नत-उल-मावा बुरूँ कर्दम ज़-दिल
जन्नतम ईं बस कि बर ख़ाक-ए-दरत मावा कुनम
दिल ब-दाग़-ए-इश्तियाक़त चूँ चराग़ अफ़रोज़ शुद
वक़्त-ए-शब शुद बे-ख़बर दीवानः अंदर रोज़ शुद
गाह दर ताब-ओ-तपिश शुद गाह अंदर सोज़ शुद
सद हज़ाराँ वै दरीं सौदा मरा इमरोज़ शुद
नीस्त सब्रम बा'द अज़ीं कि-इमरोज़ रा फ़र्दा कुनम
गर बिया-ए-सू-ए-मन क़ुर्बान-ए-सर राहत शवम
वालिह-ओ-मफ़्तून-ए-माहत ग़ैरत-ए-माहत शवम
बे-दिल-ओ-बे-जाँ ज़-’इश्क़-ए-रू-ए-दिल ख़्वाहत शवम
ख़्वाहम अज़ सौदा-ए-तू पा बोस-ए-दरगाहत शवम
या ब-पायत सर नहम या सरवरीं सौदा कुनम
पेश-ए-ख़ुद ख़्वानी अगर ख़ैर-उल-बशर यक लहज़ः
ज़िंद: गर्दद सरवर-ए-ख़स्तः यक लहज़ः
ता बसायद बर सर-ए-पा-ए-तु सर यक लहज़ः
मर्दुम अज़ शौक़-ए-तु मा'ज़ूरम मगर यक लहज़ः
'जामिया' सर नामः-ए-शौक़-ए-दिगर 'इंशा' कुनम
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.