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बख़्त-यावर को कि ’अज़्म ख़ानः-ए-मौला कुनम

ग़ुलाम सरवर लाहाैरी

बख़्त-यावर को कि ’अज़्म ख़ानः-ए-मौला कुनम

ग़ुलाम सरवर लाहाैरी

MORE BYग़ुलाम सरवर लाहाैरी

    रोचक तथ्य

    مخمس بر غزل عبدالرحمٰن جامیؔ۔

    बख़्त-यावर को कि ’अज़्म ख़ानः-ए-मौला कुनम

    चूँ ग़ुबार-ए-राह दर राहश सर-ए-शैदा कुनम

    पर गुहर ज़ाब दो दीदः-ए-दामन-ए-सहरा कुनम

    के बुवद या-रब कि रौ दर यसरिब-ए-ओ-बतहा कुनम

    गह ब-मक्कः मंज़िल-ओ-गह दर मदीनः जा कुनम

    बर दर आँ ख़ानः गर याबम ज़-बख्त-ए-ख़्वेश रह

    चार सू गर्दिश ब-गिर्दम मिस्ल-ए-दौर-ए-मेहर-ओ-मह

    दाइमा बर आस्ता-ए-ख़ानः सायम नासियः

    बर कनार-ए-ज़मज़मः अज़ दिल बद-कशम सद ज़मज़मः

    अज़ दो-चश्म-ए-ख़ूँ-फ़िशाँ आँ ख़ानः रा दरिया कुनम

    या हबीबुल्लाह ब-सू-ए-ख़ुद ब-ख़्वाँ ईं बंदः रा

    या मुजीबुल्लाह इजाबत कुन बरा-ए-हक़ दु’आ

    या नबी-अल्लाह ब-शिनो इल्तजा-ए-ईं गदा

    या रसूलुल्लाह ब-सू-ए-ख़्वेश मा रा रहनुमा

    ता ज़-फ़र्क़-ए-सर क़दम साज़म ज़-दीद: पा कुनम

    बे-तु गर बाशम ब-फ़िरदौस-ए-बरीं बाशम ख़जिल

    गर रवम दर बाग़-ए-बे-रू-ए-तु गर्दम मुज़्महिल

    मी-नुमायद बे-रुख़त दर चश्म-ए-मन गुल मिस्ल-ए-गुल

    आरज़ू-ए-जन्नत-उल-मावा बुरूँ कर्दम ज़-दिल

    जन्नतम ईं बस कि बर ख़ाक-ए-दरत मावा कुनम

    दिल ब-दाग़-ए-इश्तियाक़त चूँ चराग़ अफ़रोज़ शुद

    वक़्त-ए-शब शुद बे-ख़बर दीवानः अंदर रोज़ शुद

    गाह दर ताब-ओ-तपिश शुद गाह अंदर सोज़ शुद

    सद हज़ाराँ वै दरीं सौदा मरा इमरोज़ शुद

    नीस्त सब्रम बा'द अज़ीं कि-इमरोज़ रा फ़र्दा कुनम

    गर बिया-ए-सू-ए-मन क़ुर्बान-ए-सर राहत शवम

    वालिह-ओ-मफ़्तून-ए-माहत ग़ैरत-ए-माहत शवम

    बे-दिल-ओ-बे-जाँ ज़-’इश्क़-ए-रू-ए-दिल ख़्वाहत शवम

    ख़्वाहम अज़ सौदा-ए-तू पा बोस-ए-दरगाहत शवम

    या ब-पायत सर नहम या सरवरीं सौदा कुनम

    पेश-ए-ख़ुद ख़्वानी अगर ख़ैर-उल-बशर यक लहज़ः

    ज़िंद: गर्दद सरवर-ए-ख़स्तः यक लहज़ः

    ता बसायद बर सर-ए-पा-ए-तु सर यक लहज़ः

    मर्दुम अज़ शौक़-ए-तु मा'ज़ूरम मगर यक लहज़ः

    'जामिया' सर नामः-ए-शौक़-ए-दिगर 'इंशा' कुनम

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