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नमी दानम कि ईं मर्दुम कियानंद

नज़ीर अकबराबादी

नमी दानम कि ईं मर्दुम कियानंद

नज़ीर अकबराबादी

MORE BYनज़ीर अकबराबादी

    रोचक तथ्य

    خمسہ برغزل شیخ سعدیؔ۔

    नमी दानम कि ईं मर्दुम कियानंद

    कि याराँ रफ़्तः-ओ-ख़ुद ब-गुज़रानंद

    दिला पेश आँ कि ईं 'आलम बरानंद

    बे-फ़िगन ख़ेमः ता-महल बरानंद

    कि हम-राहान-ए-आँ 'आलम रवानंद

    मियाँ उस जा ब-जुज़ ज़ात-ए-ख़ुदावंद

    भाई है कोई अपना फ़रज़ंद

    हो दुनिया के रिश्तों में तू पाबंद

    ज़न-ओ-फ़र्ज़ंद यार-ओ-ख़्वेश-ओ-पैवंद

    बिरादर ख़्वांदगान-ए-कारवानंद

    जहाँ तक ये तमाशे हैं मुक़ाबिल

    अरे नादान ये सब हैं नक़्श-ए-बातिल

    अगर दाना तू मर्द-ए-'आक़िल

    न-बायदेस्तन अंदर सोहबते दिल

    कि बे-इशाँ ब-मानी ता ब-मानंद

    तकब्बुर में कर 'उम्र अपनी बर्बाद

    मचा मत अपने हाथों दाद-बेदाद

    तुझे क्या आह ये नुक्ता नहीं याद

    अव्वल ख़ाक बूदस्त आदमी-ज़ाद

    ब-आख़िर चूँ ब-यंदेशी हमानंद

    तवंगर क्या ग़नी क्या शाह दरवेश

    अमीर-ए-वक़्त क्या मुहताज दिल-रेश

    सभों को एक दिन चलना है दरपेश

    पस आँ बेहतर कि अव्वल आख़िर ख़्वेश

    ब-यंदेशंद-ओ-क़दर-ए-ख़ुद ब-दानंद

    सरासर काम में दुनिया के गंदे

    ग़रूर-ओ-किब्र में मत अपना तन दे

    ज़रा तू देख ले ख़ालिक़ के बंदे

    ज़मीं चंदे ब-ख़ूर्द अज़ ख़ल्क़-ओ-चंदे

    कि एहा पादशाहान-ए-जहानंद

    ये वो हैं जिन के तन थे गोरे गोरे

    मुरस्सा' जाम-ओ-ज़र्रीं आब ख़ोरे

    बड़े थे सल्तनत के उन के तोरे

    ब-गुफ़्तम तख़्तः-ए-बरकन ज़-गोरे

    ब-बीं ता-पा-ओ-शाह पासबानंद

    कहाँ है उन की वो शान-ओ-जलालत

    कहाँ वो ताज-ओ-तख़्त-ओ-मुल्क-ओ-दौलत

    ये सन कर मुझ से वो साहिब करामत

    ब-गुफ़्ता तख़्तः-ए-बरकंदन चे हाजत

    कि मी-दानम कि मुश्त-ए-उस्तुख़्वानंद

    घड़ी की 'उम्र हो या लाख का सिन

    'नज़ीर' इस बज़्म से चलना है इक दिन

    जो हो बीमार ज़ाहिर या कि बातिन

    नसीहत दारू-ए-तल्ख़स्त-ओ-लेकिन

    ज़-दारद ख़ानः-ए-'सा'दी' सितादंद

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