नमी दानम कि ईं मर्दुम कियानंद
रोचक तथ्य
خمسہ برغزل شیخ سعدیؔ۔
नमी दानम कि ईं मर्दुम कियानंद
कि याराँ रफ़्तः-ओ-ख़ुद ब-गुज़रानंद
दिला पेश आँ कि ईं 'आलम बरानंद
बे-फ़िगन ख़ेमः ता-महल बरानंद
कि हम-राहान-ए-आँ 'आलम रवानंद
मियाँ उस जा ब-जुज़ ज़ात-ए-ख़ुदावंद
न भाई है कोई अपना न फ़रज़ंद
न हो दुनिया के रिश्तों में तू पाबंद
ज़न-ओ-फ़र्ज़ंद यार-ओ-ख़्वेश-ओ-पैवंद
बिरादर ख़्वांदगान-ए-कारवानंद
जहाँ तक ये तमाशे हैं मुक़ाबिल
अरे नादान ये सब हैं नक़्श-ए-बातिल
अगर दाना तू ऐ मर्द-ए-'आक़िल
न-बायदेस्तन अंदर सोहबते दिल
कि बे-इशाँ ब-मानी ता ब-मानंद
तकब्बुर में न कर 'उम्र अपनी बर्बाद
मचा मत अपने हाथों दाद-बेदाद
तुझे क्या आह ये नुक्ता नहीं याद
न अव्वल ख़ाक बूदस्त आदमी-ज़ाद
ब-आख़िर चूँ ब-यंदेशी हमानंद
तवंगर क्या ग़नी क्या शाह दरवेश
अमीर-ए-वक़्त क्या मुहताज दिल-रेश
सभों को एक दिन चलना है दरपेश
पस आँ बेहतर कि अव्वल आख़िर ख़्वेश
ब-यंदेशंद-ओ-क़दर-ए-ख़ुद ब-दानंद
सरासर काम में दुनिया के गंदे
ग़रूर-ओ-किब्र में मत अपना तन दे
ज़रा तू देख ले ख़ालिक़ के बंदे
ज़मीं चंदे ब-ख़ूर्द अज़ ख़ल्क़-ओ-चंदे
कि एहा पादशाहान-ए-जहानंद
ये वो हैं जिन के तन थे गोरे गोरे
मुरस्सा' जाम-ओ-ज़र्रीं आब ख़ोरे
बड़े थे सल्तनत के उन के तोरे
ब-गुफ़्तम तख़्तः-ए-बरकन ज़-गोरे
ब-बीं ता-पा-ओ-शाह पासबानंद
कहाँ है उन की वो शान-ओ-जलालत
कहाँ वो ताज-ओ-तख़्त-ओ-मुल्क-ओ-दौलत
ये सन कर मुझ से वो साहिब करामत
ब-गुफ़्ता तख़्तः-ए-बरकंदन चे हाजत
कि मी-दानम कि मुश्त-ए-उस्तुख़्वानंद
घड़ी की 'उम्र हो या लाख का सिन
'नज़ीर' इस बज़्म से चलना है इक दिन
जो हो बीमार ज़ाहिर या कि बातिन
नसीहत दारू-ए-तल्ख़स्त-ओ-लेकिन
ज़-दारद ख़ानः-ए-'सा'दी' सितादंद
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