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ऐ दिल ग़ुलाम-ए-शाह जहाँ बाश-ओ-शाह बाश

हाफ़िज़

ऐ दिल ग़ुलाम-ए-शाह जहाँ बाश-ओ-शाह बाश

हाफ़िज़

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    दिल ग़ुलाम-ए-शाह जहाँ बाश-ओ-शाह बाश

    पैवस्त: दर हिमायत-ए-लुत्फ़-ए-इलाह बाश

    दिल दुनिया के बादशाह का ग़ुलाम बन और बादशाह बन, हमेशा ख़ुदा की मेहरबानी और रहमत के साये में रह।

    अज़ ख़ारिजी हज़ार ब-यक जौ नमी ख़रंद

    गो कोह-ता-ब-कोह मुनाफ़िक़ पनाह बाश

    हज़ार गुमराहों को एक जौ के दाने के बराबर भी नहीं ख़रीदा जा सकता, चाहे वे पहाड़ से पहाड़ तक पाखंडियों की पनाह क्यों हों।

    चूँ अहमदम शफ़ीअ' बुवद रोज़-ए-रस्तख़ेज़

    गो ईं तन-ए-बला-कश-ए-मन पुर गुनाह बाश

    क़यामत के दिन जब अहमद मेरे सिफ़ारिशी होंगे, तो कह देना कि मेरा यह मुसीबतों का मारा जिस्म गुनाहों से भरा हुआ है।

    आँ-रा कि दोस्ती-ए-'अली नीस्त काफ़िरस्त

    गो ज़ाहिद-ए-ज़मानः-ओ-गो शैख़-ए-राह बाश

    जिसे हज़रत अली की दोस्ती नसीब हो वह काफ़िर है, चाहे वह सारी दुनिया का सबसे बड़ा संयमी और तसव्वुफ़ का शैख़ ही क्यों हो।

    इमरोज़ ज़िंद:-अम ब-विला-ए-तू या 'अली

    फ़र्दा ब-रूह-ए-पाक-ए-इमामाँ गवाह बाश

    अली! आज मैं तेरी दोस्ती की वजह से ज़िन्दा हूँ, कल क़यामत के दिन पाक इमामों की रूहों के सदक़े तुम मेरे गवाह रहना।

    क़ब्र-ए-इमाम-ए-हश्तम-ए-सुल्तान-ए-दीं रज़ा

    अज़ जाँ ब-बोस-ओ-बर दर-ए-आँ बारगाह बाश

    दीन के बादशाह आठवें इमाम, इमाम रज़ा की क़ब्र को अपनी जान से चूम, और हमेशा उस मुबारक दरगाह के दरवाज़े पर पड़ा रह।

    दस्तत नमी-रसद कि ब-चीनी गुले ज़-शाख़

    बारे ब-पाए-गुलबन-ए-ईशाँ गियाह बाश

    अगर तेरा हाथ किसी शाख़ से फूल लेने तक नहीं पहुँच सकता, तो कम से कम एक बार उस फूलों की शाख़ के नीचे घास बन जा।

    मर्द-ए-ख़ुदा कि ज़ाहिद-ए-तक़्वा तलब बुवद

    ख़्वाही सफ़ेद जामः-ओ-ख़्वाही स्याह बाश

    वही ख़ुदा का सच्चा बंदा है जो संयम और पवित्रता की इच्छा रखता हो, चाहे वह सफ़ेद कपड़े पहने या काले कपड़े।

    'हाफ़िज़' तरीक़-ए-बंदगी-ए-शाह पेशः कुन

    वाँ गाह दर तरीक़ चू मर्दान-ए-राह बाश

    हाफ़िज़! शाह की ग़ुलामी को अपना पेशा बना ले, फिर तू भी तसव्वुफ़ की में राह के मर्दों (सच्चे) की तरह बन जाएगा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : नग़मातुल उंस फ़ी मजालिसिल क़ुदस (पृष्ठ 223)
    • रचनाकार :शाह हिलाल अहमद क़ादरी
    • प्रकाशन : दारुल एशा'अत ख़ानक़ाह मुजीबिया (2016)
    • संस्करण : First
    • पुस्तक : दीवान-ए-हाफ़िज़ (पृष्ठ 256)
    • रचनाकार :हाफ़िज़ शीराज़ी
    • प्रकाशन : प्रोग्रेसिव बुक्स, लाहाैर

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