Font by Mehr Nastaliq Web

सर-गुज़श्त-ए-मन अदा अज़ हर ज़बाने मी-शवद

मीर तक़ी मीर

सर-गुज़श्त-ए-मन अदा अज़ हर ज़बाने मी-शवद

मीर तक़ी मीर

MORE BYमीर तक़ी मीर

    सर-गुज़श्त-ए-मन अदा अज़ हर ज़बाने मी-शवद

    ईं हिकायत रफ़्तः-रफ़्तः दास्ताने मी-शवद

    मेरी जीवन-कथा हर ज़बान पर कही जा रही है,

    ये कहानी धीरे-धीरे एक दास्तान बनती जा रही है।

    गर ब-ईं अंदाज़ ख़ुद रा मी-नुमायद चंद रोज़

    ख़ाल-ए-रुख़्सार-ए-तु मह दाग़-ए-जाने मी-शवद

    अगर तू कुछ दिनों तक इसी अंदाज़ से ख़ुद को दिखाता रहा,

    चाँद! तेरे गाल का वो तिल जान पर भारी दाग़ बन जाएगा।

    ईं न-पिंदारी कि ख़्वाही शुद ब-पीर-ए-ना-तवाँ

    क़ामत-ए-ख़म-गश्तः हम बार-ए-गिराने मी-शवद

    ये मत समझ कि बुढ़ापे में आदमी कमज़ोर हो जाता है,

    झुका हुआ शरीर भी कभी-कभी बहुत बड़ा बोझ बन जाता है।

    ज़र्रः-ज़र्रः ख़ाक-ए-मन लबरेज़-ए-शोर-ए-'इश्क़-ए-ऊस्त

    चूँ ब-हम मी-आयद ईं अज्ज़ा जहाने मी-शवद

    मेरी मिट्टी का एक-एक कण उसके इश्क़ के जुनून से भरा है,

    जब ये सारे हिस्से मिलते हैं, तो एक पूरी दुनिया बन जाती है।

    दर नज़र क़द्र-ए-बुलनदे दारम अज़ 'इज्ज़-ओ-नियाज़

    ईं ज़मीन-ए-पस्त रोज़े आसमाने मी-शवद

    नर्मी और विनय की वजह से मेरी नज़र में बड़ा मान है,

    ये नीची ज़मीन भी एक दिन आसमान बन जाएगी।

    दिल क़वी दारेद रिंदाँ शैख़ शाहिद बाज़ शुद

    'आक़िबत ईं बे-हक़ीक़त क़ल्तबानए मी-शवद

    रिंदो! दिल मज़्बूत रखो, शैख़ अब हुस्न-परस्त हो चुका है,

    ये बदनाम व्यक्ति आख़िरकार औरतों का दलाल बन जाएगा।

    अज़ नियाज़-ए-हर ज़मान-ए-'मीर' मी-दानेम मा

    कि ईं जवान-ए-रफ़्तः ख़ाक-ए-आस्ताने मी-शवद

    ‘मीर’ की हर वक़्त की आरज़ू-मंदी से हम ये समझते हैं

    कि ये जवान अंततः किसी आस्ताने की धूल बन जाएगा।

    स्रोत :
    • पुस्तक : दिवान-ए-मीर, फ़ारसी (पृष्ठ 164)
    • रचनाकार : अफ़ज़ाल अहमद स्य्येद

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए