तर्क-ए-आरज़ू कर्दम रंज-ए-हस्ती आसाँ शुद
तर्क-ए-आरज़ू कर्दम रंज-ए-हस्ती आसाँ शुद
मिर्ज़ा अब्दुल क़ादिर बेदिल
MORE BYमिर्ज़ा अब्दुल क़ादिर बेदिल
तर्क-ए-आरज़ू कर्दम रंज-ए-हस्ती आसाँ शुद
सोख़्त पर-फ़िशानी-हा कि-ईं क़फ़स गुलिस्ताँ शुद
’आलम अज़ जुनून-ए-मन कर्द कस्ब-ए-हमवारी
सैल-ए-गिर्यः-ए-सर दादम कोह-ओ-दश्त दामाँ शुद
ख़ामुशी ब-दामानम शोर-ए-सद क़यामत रेख़्त
काश्तम नफ़्स दर दिल रीशः-ए-नीस्ताँ शुद
हर कुजा नज़र कर्दम फ़िक्र-ए-ख़्वेश रा हम ज़द
ग़ुंचः-ए-ता-गुल-ए-ईं-बाग़ बहर-ए-मन गरेबाँ शुद
बर सफ़ा-ए-दिल-ए-ज़ाहिद ईं-क़दर चे मी-नाज़ी
हर चे आईनः-ए-गर्दीद बाब-ए-ख़ुद-फ़रोशाँ शुद
'इश्क़ शिकवः-ए-आलूदस्त ता-चे दिल फ़सुर्द इमरोज़
सैल-ए-मी-रवद नौमीद ख़ानः ऐ कि वीराँ शुद
जेब अगर ब-ग़ारत रफ़्त दामनी ब-दस्त आरेम
ऐ जुनूँ ब-सहरा-ज़न नौ-बहार-ए-’उर्याँ शुद
जब्रयान-ए-तक़्दीरेम क़ौल-ओ-फे़'ल-ए-मा ’इज्ज़स्त
वह्म मी-कुनद मुख़्तार आँ क़दर कि न-तवाँ शुद
बर्क़-ए-रफ़्तन-ए-होशस्त या ख़याल-ए-दीदारी
चूँ सिपंद अज़ दुरम आतिशी नुमायाँ शुद
चीन-ए-नाज़-ए-पर्वरदः अस्त गिर्द-ए-वहशतम ‘बेदिल’
दामनी गर अफ़्शांदम तुर्रः ऐ परेशाँ शुद
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