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Sheikh Zuhooruddin Hatim

1699 - 1791 | Delhi, India

Ashaar of Sheikh Zuhooruddin Hatim

पहन कर जामा बसंती जो वो निकला घर सूँ

देख आँखों में मिरी फूल गई है सरसों

मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के

हम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के

मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली

उठो यारो भरो रंगों से झोली

होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने

नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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