Ashaar of Sheikh Zuhooruddin Hatim
पहन कर जामा बसंती जो वो निकला घर सूँ
देख आँखों में मिरी फूल गई है सरसों
मौसम-ए-होली है दिन आए हैं रंग और राग के
हम से तुम कुछ माँगने आओ बहाने फाग के
मुहय्या सब है अब अस्बाब-ए-होली
उठो यारो भरो रंगों से झोली
होली के अब बहाने छिड़का है रंग किस ने
नाम-ए-ख़ुदा तुझ ऊपर इस आन अजब समाँ है
aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere