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आक़ा सलाम लीजे मौला सलाम लीजे

अमीर बख़्श साबरी

आक़ा सलाम लीजे मौला सलाम लीजे

अमीर बख़्श साबरी

MORE BYअमीर बख़्श साबरी

    आक़ा सलाम लीजे मौला सलाम लीजे

    लिल्लाह सलाम लीजे वल्लाह सलाम लीजे

    ताजदार-ए-बतहा ताजदार-ए-तैबा

    राज़दार-ए-मौला शाहा सलाम लीजे

    ज़ीनत-ए-मदीना बरकत-ए-मदीना

    रहमत-ए-मदीना सदहा सलाम लीजे

    कौन-ओ-मकान वाले दोनों जहान वाले

    यकताई शान वाले यकता सलाम लीजे

    रौज़े का तेरे जल्वा है तूर का तजल्ला

    उस गुंबद-ए-ख़िज़्र का सदक़ा सलाम लीजे

    का’बा-ए-दो-’आलम क़िब्ला-ए-दो-’आलम

    मुर्शिद-ए-दो-’आलम आक़ा सलाम लीजे

    मय-कश की हस्तियों में बादा-परस्तीयों में

    मस्तों की मस्तियों में डूबा सलाम लीजे

    कौन आप का है सानी तौहीद-ए-हक़ के बानी

    आमना के जानी मेरा सलाम लीजे

    मौक़ा' है हाज़िरी का दरबार-ए-सरवरी का

    'अमीर'-ए-साबरी का आक़ा सलाम लीजे

    स्रोत :
    • पुस्तक : Kalaam-e-Ameer Sabri (पृष्ठ 4)

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