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बे-सहारों के सहारे मुस्तफ़ा को हो सलाम

हाफ़िज़ अब्दुल जलील

बे-सहारों के सहारे मुस्तफ़ा को हो सलाम

हाफ़िज़ अब्दुल जलील

MORE BYहाफ़िज़ अब्दुल जलील

    बे-सहारों के सहारे मुस्तफ़ा को हो सलाम

    रहमत-ए-’आलम हबीब-ए-किब्रिया को हो सलाम

    हैदर-ओ-हसनैन-ओ-ज़हरा आए जिस चादर तले

    अल-मुज़म्मिल शान वाली उस रिदा को हो सलाम

    जिन की 'अज़्मत का बयाँ है आया-ए-ततहीर में

    अहल-ए-बैत-ए-पाक की शान-ए-’ओला को हो सलाम

    जिस का चेहरा देखना भी है 'इबादत वो 'अली

    मुर्तज़ा मुश्किल-कुशा शेर-ए-ख़ुदा को हो सलाम

    तेरी आमद पर हुए सर ख़म सभी के हश्र में

    नूर-ए-चश्म-ए-मुस्तुफ़ा तेरी हया को हो सलाम

    हसन तेरी फ़िरासत पर हो कुल दानिश निसार

    राहत-ए-जान-ए-नबी तेरी ज़का को हो सलाम

    जिस की दिल-जोई की ख़ातिर हो गया सज्दा तवील

    राकिब-ए-दोश-ए-नबी की उस अदा को हो सलाम

    ता-दम-ए-आख़िर रहा तुझ को प्यासों का ख़याल

    'अलम-दार-ए-वफ़ा तेरी वफ़ा को हो सलाम

    क़ासिम-ओ-औन-ओ-मोहम्मद अकबर-ओ-असग़र सभी

    ग़ुन्चा-हा-ए-नाज़नीन-ओ-दिलरुबा को हो सलाम

    अकबर-ओ-असग़र के लाशे देख कर भीगी आँख

    कर्बला में सब्र की इस इंतिहा को हो सलाम

    दीं बचाने के लिए जब कर दिया कुम्बा निसार

    मंब'-ए-जूद-ओ-सख़ा तेरी सख़ा को हो सलाम

    जान-ओ-माल-ओ-आल दे कर ज़िंदा-ए-जावेद हैं

    शहीद-ए-कर्बला ऐसी बक़ा को हो सलाम

    देख कर नोक-ए-सिनाँ पर सर तेरा बोले मलक

    मर्हबा सिब्त-ए-नबी तेरी अना को हो सलाम

    ज़ेर-ए-ख़ंजर की अदा शब्बीर ने ऐसी नमाज़

    सब 'अदू कहने लगे हुस्न-ए-अदा को हो सलाम

    मुस्तफ़ा की आल का जो दर्द रखते हैं 'जलील'

    ता-क़यामत उन ग़ुलामों की वफ़ा को हो सलाम

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