सलाम ऐ सय्यद-ए-'आलम सलाम ऐ सरवर-ए-ज़ीशाँ
सलाम ऐ सय्यद-ए-'आलम सलाम ऐ सरवर-ए-ज़ीशाँ
सलाम ऐ जल्वा-ए-यज़्दाँ सलाम ऐ 'अज़्मत-ए-इंसाँ
सलाम ऐ रहमतुल-लिल-'आलमीं ऐ शाफ़े'-ए-उम्मत
सलाम ऐ मालिक-ए-जन्नत सलाम ऐ नाज़िश-ए-ख़ूबाँ
सलाम ऐ पैकर-ए-हुस्न-ए-अज़ल ऐ सूरत-ए-ज़ेबा
सलाम ऐ हुस्न-ए-दिल-आरा सलाम ऐ रूह-ए-इंस-ओ-जाँ
सलाम ऐ मेहर-ए-'आलम-ताब ऐ कौनैन के वारिस
सलाम ऐ औज-ए-ला-फ़ानी सलाम ऐ ’अर्श के मेहमाँ
सलाम ऐ शाह-ए-बहर-ओ-बर सलाम ऐ क़ासिम-ए-कौसर
सलाम ऐ दस्तगीर-ए-हर-दो-’आलम का'बा-ए-ईमाँ
सलाम ऐ ज़ी-वजाहत पाक-सीरत अतहर-ओ-अक़्दस
सलाम ऐ रौनक़-ए-बज़्म-ए-जहाँ ऐ मरकज़-ए-’इरफ़ाँ
सलाम ऐ मंबा-ए-जूद-ओ-करम ऐ क़िब्ला-ए-'आलम
सलाम ऐ मुद्द’आ-ए-किब्रिया ऐ हादी-ए-दौराँ
सलाम ऐ फ़ैज़-गुस्तर शाह-ए-ज़ी-जाह सय्यद-ए-वाला
सलाम आईना-ज़ात-ए-ख़ुदा ऐ मुसहफ़-ए-क़ुरआँ
सलाम ऐ ‘इज़्ज़त-ए-आदम सलाम ऐ इब्न-ए-’अब्दुल्लाह
सलाम ऐ नूर-ए-’ऐन-ए-आमना ऐ जान-ए-मश्ताक़ाँ
सलाम ऐ शो’ला-ए-यक्ता सलाम ऐ शान-ए-यकताई
सलाम 'इज्ज़ ऐ जान-ए-बहार-ए-’आलम-ए-इमकाँ
मैं इक मुहताज-ए-बे-वक़अत तुम्हारा बंदा-ए-’आजिज़
तुम्हारे नाम से होती है हर मुश्किल मिरी आसाँ
तुम्हारा ग़म है तस्कीन-दिल-ओ-जाँ या-रसूलल्लाह
यही ग़म बन गया है अब हरीफ़-ए-गर्दिश-ए-दौराँ
यही इक आरज़ू है आप के ‘सत्तार’-ए-'आसी की
फ़ना-फ़िल-'इश्क़ हो कर आप पे हो जाए ये क़ुर्बां
- पुस्तक : मुअत्तर मुअत्तर (पृष्ठ 75)
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