सरापा रहमत शफ़ी’-ए-महशर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
सरापा रहमत शफ़ी’-ए-महशर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
वासिफ़-उल-क़ादरी नानपारवी
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सरापा रहमत शफ़ी’-ए-महशर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
किलीद-ए-जन्नत क़सीम-ए-कौसर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
फ़लक पे क़ुदसी ज़मीं पर इंसाँ सदफ़ के मोती चमन के ग़ुंचे
अदब से कहते हैं सर झुका कर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
शजर तसद्दुक़ हजर तसद्दुक़ हर एक ला'ल-ओ-गुहर तसद्दुक़
निसार दोनों जहान तुम पर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
गुलों के हैरत-नुमा नज़ारे ये आबशार और हसीन धारे
फ़िदा हैं सब नज्म-ओ-माह-ओ-नय्यर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
ये ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं ये रू-ए-ताबाँ गुलाबी लब और चे ज़नख़दाँ
है शब तसद्दुक़ सहर निछावर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
ख़ुदाई क्या है ख़ुदा तुम्हारा मगर ग़िज़ा नान-ए-जौ का पारा
वो ख़िश्त-तकिया चटाई बिस्तर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
क़मर इशारा से हो दो-पारा यद-ए-करम से रवाँ हो चश्मा
सुनाएँ कलिमा अदब से पत्थर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
वो दुश्मनों को पयाम-ए-उल्फ़त ज़बान-ए-शीरीं से दर्स-ए-वहदत
वो संग-बारी से ज़ख़्म सर पर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
मिज़ाज ना-साज़ ग़ैर हालत वो शब को उठना प-ए-'इबादत
वो काली कमली में जिस्म-ए-अतहर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
न भूले तुम जिस को वक़्त-ए-रेहलत वो नाज़ पर तुम्हारी उम्मत
ये कह रही है मिरे पयम्बर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
बुला लो 'वासिफ़' को दर पर अपने बना लो मफ़्तूँ दिखा दो जल्वा
बहुत है अब बे-क़रार-ओ-मुज़्तर हिजाज़ी-दूल्हा सलाम तुम पर
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