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सूफ़ी उद्धरण
हराम या नाजायज़ चीज़ों से परहेज़ करना और अपने दिल को तमाम ज़लील और बुरे अख़लाक़ से पाक करना, इश्क़-ए-हक़ीक़ी की तलब को बढ़ाता है। हमेशा कोशिश करो कि हराम या जिन मे शक हो, उन निवालों से दूर रहो। नफ़्स की निंदा के लायक़ चीज़ों, जैसे- ग़ुस्सा, बदअख़लाक़ी, बे-हिसाब जिस्मानी ख़्वाहिशात और दूसरी चीज़ें, ज़ाहिर न हों। जब तक तुम ख़ुदा की मदद के तालिब नहीं बनोगे, इन से छुटकारा नहीं पा सकते। इसलिए, हमेशा फ़रमाबरदार और आज़िज़ बने रहो।
हराम या नाजायज़ चीज़ों से परहेज़ करना और अपने दिल को तमाम ज़लील और बुरे अख़लाक़
ख़्वाजा बाक़ी बिल्लाह
दोहरा
सोज़ फ़िराक नसीब असाडे
कर तकबीर होवे छुटकारा, मत मौत हराम न मरसां ।हाशम तलब रहे जिन्द जाए, तां मैं शुकर हज़ारां करसां ।
हाशिम शाह
दोहरा
दौलत माल जहान प्यारा
दिल विच शौक बख़ील चुफेरे, मेरा होगु किवें छुटकारा ।हाशम आओ मिलायो रांझा, मेरा सुख दिल दा दुख सारा ।
हाशिम शाह
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ना'त-ओ-मनक़बत
रस्म बद की लानतों से पाया छुटकारा समाजसुरूर दें ने सुरों पर रख दिया अ'ज़्मत का ताज
महबूब गौहर इस्लामपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
पहुँच लेगा जहाँ में जब कि एक एक उम्मती उन काकहीं उस वक़्त होगा ग़म से छुटकारा मोहम्मद का
अज्ञात
सूफ़ी साहित्य
बहरुल हयात (अमृतकुंड)
ज़िक्र-ए-जिगर आसन:-इस आसन में मज़कूरा बाला तरीक़े की रौशनी में बाएँ हाथ को दाएँ कंधे की