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ग़ज़ल
गए होश-ओ-ख़िरद इश्क़-ए-लब-ए-जाँ-बख़श-ए-जानाँ मेंक़यामत है हमारी नाव डूबी आब-ए-हैवाँ में
रज़ा फ़िरंगी महली
ग़ज़ल
जिगर मुरादाबादी
ग़ज़ल
जिगर मुरादाबादी
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फ़ारसी कलाम
दिल-ओ-दीं बुर्दी-ओ-होश-ओ-ख़िरद-ओ-सब्र-ओ-क़रारदीगर अज़ 'ख़ुसरव'-ए-बेदिल चे तमन्ना दारी
अमीर ख़ुसरौ
ना'त-ओ-मनक़बत
जान-ओ-दिल होश-ओ-ख़िरद सब तो मदीने पहुँचेतुम नहीं चलते 'रज़ा' सारा तो सामान गया
अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ओ-मनक़बत
मेरी दीवानगी है हासिल-ए-सद होश-ओ-ख़िरदक्या बताऊँ ये मिली किस की बदौलत ख़्वाजा
क़ैसर रत्नागीरवी
ना'त-ओ-मनक़बत
लिए बैठा हूँ सब होश-ओ-ख़िरद क़ुर्बान करने कोज़रा जुम्बिश में आए तेरी चश्म-ए-नाज़नींं वारिस
क़ैसर शाह वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
क़ल्ब-ओ-जाँ ईमाँ-ओ-दीं होश-ओ-ख़िरद जाह-ओ-हशमहो चुके हैं सब के सब नज़्राना-ए-शाह-ए-रुसुल
क़ातिल अजमेरी
मुख़म्मस
या-ग़ियासुल-मुस्तग़सीन अल-ग़ियासो-वल-मददचश्म-ए-फ़त्ताँ ने किसी की ले लिया होश-ओ-ख़िरद
अमजद हैदराबादी
ग़ज़ल
'बर्क़ी' जो ख़ुद-शनास है वो है ख़ुदा-शनासगुम-गश्तगी-ए-होश-ओ-ख़िरद बे-ख़ुदी नहीं
अहमद अली बर्क़ी आज़मी
ग़ज़ल
होश-ओ-ख़िरद भी अल-फ़िराक़ो-बैनी-व-बैनका कहेंहज़रत-ए-दिल का ख़ैर से है सफ़र-ए-हिजाज़-ए-इश्क़

