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ना'त-ओ-मनक़बत
आप के हिज्र में बाक़ी न रही ताक़त-ए-ज़ब्तआओ अब ख़ाक पर 'अकबर' का तड़पना देखो
शाह अकबर दानापूरी
ना'त-ओ-मनक़बत
होगा बड़े बड़ों का हंगामा रोज़-ए-महशर'अकबर' क़ुबूल होगा क्यूँ कर सलाम तेरा
शाह अकबर दानापूरी
ना'त-ओ-मनक़बत
मैं निकलने उसे दूँगा मिरा नाम 'अकबर' हैजान-ए-जाँ दिल में मिरे दर्द है पिन्हाँ तेरा
शाह अकबर दानापूरी
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कलाम
हाज़िर है बज़्म-ए-यार में सामान-ए-ऐश सबअब किस का इंतिज़ार है 'अकबर' कहाँ हो तुम
शाह अकबर दानापूरी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
आदम शुद अज़ बहिश्त जुदा मन ज़े कू-ए-दोस्तबुलबुल ज़े बाग़-ओ-'अकबर'-ए-मा अज़ वतन जुदा
शाह अकबर दानापूरी
ग़ज़ल
फ़ित्रतन थे एक हम दोनों मगर हुक्म-ए-ख़ुदावो तो रश्क-ए-गुल हुए मैं ‘अकबर’-ए-शैदा हुआ
शाह अकबर दानापूरी
ना'त-ओ-मनक़बत
फिर चला 'अकबर' मदीने को फ़क़ीर अल्लाह काफिर दिखाया ख़ूबी-ए-क़िस्मत ने लुत्फ़ इस राह का
शाह अकबर दानापूरी
ना'त-ओ-मनक़बत
किस गुल में बू नहीं गुल-ए-रुख़्सार-ए-यार कीवो कौन सा चमन है जो 'अकबर' बसा नहीं
शाह अकबर दानापूरी
ना'त-ओ-मनक़बत
उन को अ’ज़ाब-ए-हश्र से अकबर मिली नजातनाजी हैं ज़ाइरान-ए-मज़ार-ए-अबुल-उ'ला