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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
आमद बहार ऐ यार-ए-मन ब-शगुफ़्त गुलहा दर चमनशुद दर नवा हर बुलबुले बर शाख़-ए-सर्व-ओ-नारवन
अमीर ख़ुसरौ
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कलाम
क़मर जलालवी
ग़ज़ल
जो वो बहार-ए-अज़ार-ए-ख़ूबी चमन में आता ख़िराम करतासनोबर-ओ-सर्व हर एक आ कर ज़रूर उस को सलाम करता




