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कृष्ण भक्ति सूफ़ी कलाम
कधी मोहतिया मोह न आवे 'औघट' कौने काजकुबरी ऐसी प्रीत करो कि मिलें कृष्ण-महराज
औघट शाह वारसी
अरिल्ल
अरिल छंद - माया मोह के साथ सदा नर सोइया
माया मोह के साथ सदा नर सोइयाआखिर ख़ाक निदान सत्त नहिं जिया
गुलाल साहब
पद
जउ हम बाँधे मोह फाँस हम प्रेम बंधनि तुम बाँधे
मोह पटलु सभु जगतु बिआपिउ भगत नहीं संतापाकहि 'रविदास' भगति इक बाढ़ी अब इह कासिउ कहीऐ
रैदास
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ग़ज़ल
चित चोर लियो मन मोह लियो किरपा जो भई मो पे साजन कीभई मैं तो दीवानी ऐ री सखी छब देख के वा के नैनन की
मंज़ूर आरफ़ी
पद
पहले मया-मोह को छोड़ के हर से मारे मने को
पहले मया-मोह को छोड़ के हर से मारे मने कोपेम की आग लगाए के ऐ 'दिलदार' जलावे तन को
कवि दिलदार
होली
हुलसात जिया पिया देखन को न सुहात कछू मोहि बिरहन कोदो नैन बहि झर की झरनाँ मानों राहें रुत सावन को
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ माह-ए-रास्तीं ज़े-शबिस्तान-ए-कीस्तीवाए आफ़ताब-रूए ब-गो ज़ान-ए-कीस्ती
शैख़ जमालुद्दिन हान्सवी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
मज़रा-ए’-सब्ज़-ए-फ़लक दीदम-ओ-दास-ए-मह-ए-नौयादम अज़ किश्तः-ए-ख़्वेश आमद-ओ-हंगाम-ए-देरौ
हाफ़िज़
फ़ारसी कलाम
ऐ माह-ए-'आलम सोज़-ए-मन अज़ मन चिरा रंजीद:-ईवै शम-ए'-शब अफ़्रोज़-ए-मन अज़ मन चिरा रंजीद:-ई
सादी शीराज़ी
फ़ारसी कलाम
परतव-ए-महर-ए-क़दीमस्त ईं मह-ए-ताबान-ए-'इश्क़जल्वा-ए-नूर-ए-कलीमसत आतिश-ए-सोज़ान-ए-'इश्क़
