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ना'त-ओ-मनक़बत
नबी का नाम जब मेरे लबों पर रक़्स करता हैलहू भी मेरे शिरयानों के अंदर रक़्स करता है
मुज़फ़्फ़र वारसी
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विषय
आ’शिक़
आशिक़
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सूफ़ी लेख
ज़िक्र-ए-ख़ैर ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़
ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़ एक महान सूफ़ी शा’इर हुए हैं। अगर उनकी ज़िंदगी और शाइरी पर नज़र
रय्यान अबुलउलाई
ग़ज़ल
ये जो लगा है तीर मुझे ऐ कमान-ए-इश्क़महशर में देखियो यही होगा निशान-ए-इश्क़
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
गरदूँ सदफ़-ए-गौहर-ए-यक दान:-ए-इश्क़ अस्तख़ुर्शीद-ए-जहाँताब नगीँ-ख़ान:-ए-इश्क़ अस्त
साएब तबरेज़ी
शे'र
कहियो ऐ क़ासिद पयाम उस को कि तेरे हिज्र सेजाँ-ब-लब पहुँचा नहीं आता है तू याँ अब तलक
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
ग़ज़ल
आह फिर तुझ को ऐ बे-रहम ख़बर करते हैंया'नी आ जा दम-ए-आख़िर है सफ़र करते हैं
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ज़हे 'इश्क़ ज़हे 'इश्क़ कि मा रास्त ख़ुदायाचे नग़्ज़स्त-ओ-चे ख़ूबस्त-ओ-चे ज़ेबास्त ख़ुदाया

