आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "ruu-ba-ruu-e-naaseh-e-barham"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "ruu-ba-ruu-e-naaseh-e-barham"
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ऐ तालिब-ए-फ़िरदौस ब-रौ सू-ए-मोहम्मदचूँ ख़ुल्द-ए-बरीं आमदः दर कू-ए-मोहम्मद
अमीर हसन अला सिज्ज़ी
सूफ़ी कहावत
रू बरू बूदन बे अज़ पहलू बुवद
किसी व्यक्ति के सामने बैठना उसके पास बैठने से बेहतर है।
वाचिक परंपरा
शब्दकोश से सम्बंधित परिणाम
अन्य परिणाम "ruu-ba-ruu-e-naaseh-e-barham"
ग़ज़ल
ऐ माह-ए-ख़ुश-रू कह दे अब जो बात हैकि पैमाना-ए-तजस्सुसस-ए-मन मुंतज़िर-ए-ब-इल्तिफ़ात है
अहमद अब्दुल रहमान
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
साक़ी-ए-फ़र्ख़ुन्द:-रू ख़ेज़- व ब-देह जाम रावज़ मय-ए-ख़ुद मस्त कुन ईं दिल-ए-नाकाम रा
अहमद शाहजहाँपुरी
फ़ारसी कलाम
निज़ामुद्दीन औलिया
ग़ज़ल
ऐ मिरे माह-रू तिरी चश्म-ए-सितारा साँ के बा’दचाँद की दीद क्या करें रूयत-ए-कहकशाँ के बा'द
सायमा ज़ैदी
शे'र
अदब से सर झुका कर क़ासिद उस के रू-ब-रू जानानिहायत शौक़ से कहना पयाम आहिस्ता आहिस्ता
अज़ीज़ सफ़ीपुरी
ग़ज़ल
रो रो के ज़ार-ज़ार ये कहता है जान-ए-अब्रहो चश्म-ए-अश्क-बार पे ये साएबान-ए-अब्र
ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
मी-नुमायद हर ज़माँ रू अज़ परी-रू-ए-दिगरता-कशद हर दम गरेबान-ए-मन अज़ सू-ए-दिगर



