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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ब-रौ ऐ तबीबम अज़ सर कि ख़बर ज़े-सर न-दारमब-ख़ुदा रहा कुनम जान कि ज़े-जान ख़बर न-दारम
हाफ़िज़
फ़ारसी कलाम
ऐ सर-पनाह-ए-बे-कसाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रसवे दस्तगीर-ए-'आजिज़ाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रस
नस्र फुलवारवी
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विशेष
कह मुकरनी
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कलाम
न तु कश्फ़-ए-दस्त-ए-मसीह दे न तजल्ली-ए-सर-ए-तूर देतेरे बस में अगर ऐ ख़ुदा मुझे ज़िंदगी का शु'ऊर दे
इज़हार असर
ग़ज़ल
इश्क़ में ऐ कोहकन क्या ज़ख़्म-ए-सर दरकार थाज़ख़्म-ए-दिल दरकार था ज़ख़्म-ए-जिगर दरकार था
आसी गाज़ीपुरी
शे'र
वो ऐ 'सीमाब' क्यूँ सर-ग़श्तः-ए-तसनीम-ओ-जन्नत होमयस्सर जिस को सैर-ए-ताज और जमुना का साहिल है
सीमाब अकबराबादी
शे'र
इ’श्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो होऐ’श-ओ-निशात-ए-ज़िंदगी छोड़ दिया जो हो सो हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
इश्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो होऐश-ओ-निशात-ए-ज़िंदगी छोड़ दिया जो हो सो हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
शे'र
इ'श्क़ में तेरे कोह-ए-ग़म सर पे लिया जो हो सो होऐश-ओ-निशात-ए-ज़िंदगी छोड़ दिया जो हो सो हो
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
पद
कठिन साधना-पथ - गुरु प्यारे का मारग झीना कोह गुरुमुख जाय
गुरु प्यारे का मारग झीना कोह गुरुमुख जायगुरु प्यारे का मारग झीना कोह गुरुमुख जाय
शालीग्राम
दोहा
कलमः कह सब सर धुनें जाका और न छोर
कलमः कह सब सर धुनें जाका और न छोरवारिस का मुख देख के सब चितवैं वही ओर
जंगली शाह वारसी
कलाम
फिर चराग़-ए-लाला से रौशन हुए कोह-ओ-दमनमुझ को फिर नग़्मों पे उकसाने लगा मुर्ग़-ए-चमन
अल्लामा इक़बाल
फ़ारसी कलाम
ऐ तीर-ए-ग़मत रा दिल-ए-'उश्शाक़ निशान:ख़ल्क़े ब-तु मश्ग़ूल-ओ-तू ग़ाएब ज़-मयानः
