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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ब-रौ ऐ तबीबम अज़ सर कि ख़बर ज़े-सर न-दारमब-ख़ुदा रहा कुनम जान कि ज़े-जान ख़बर न-दारम
हाफ़िज़
फ़ारसी कलाम
ऐ सर-पनाह-ए-बे-कसाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रसवे दस्तगीर-ए-'आजिज़ाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रस
नस्र फुलवारवी
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ग़ज़ल
इश्क़ में ऐ कोहकन क्या ज़ख़्म-ए-सर दरकार थाज़ख़्म-ए-दिल दरकार था ज़ख़्म-ए-जिगर दरकार था
आसी गाज़ीपुरी
शे'र
वो ऐ 'सीमाब' क्यूँ सर-ग़श्तः-ए-तसनीम-ओ-जन्नत होमयस्सर जिस को सैर-ए-ताज और जमुना का साहिल है
सीमाब अकबराबादी
साखी
सेवक और दास का अंग - गुरू समरथ सिर पर खड़े कहा कमी तोहि दास
गुरू समरथ सिर पर खड़े कहा कमी तोहि दासऋध्दि सिध्दि सेवा करैं मुक्ति न छाड़ै पास
कबीर
शे'र
पस-ए-मुर्दन तो मुझ को क़ब्र में राहत से रहने दोतुम्हारी ठोकरों से उड़ता है ख़ाका क़यामत का
अकबर वारसी मेरठी
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
अज़ शहर-ए-तू रफ़्तेम-ओ-तुरा सैर न-दीदेमवज़ शाख़-ए-दरख़्त-ए-तू चुनीं ख़ाम फ़तीदेम

