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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
ब-रौ ऐ तबीबम अज़ सर कि ख़बर ज़े-सर न-दारमब-ख़ुदा रहा कुनम जान कि ज़े-जान ख़बर न-दारम
हाफ़िज़
शे'र
वो ऐ 'सीमाब' क्यूँ सर-ग़श्तः-ए-तसनीम-ओ-जन्नत होमयस्सर जिस को सैर-ए-ताज और जमुना का साहिल है
सीमाब अकबराबादी
फ़ारसी कलाम
ऐ सर-पनाह-ए-बे-कसाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रसवे दस्तगीर-ए-'आजिज़ाँ फ़रियाद-रस फ़रियाद-रस
नस्र फुलवारवी
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ग़ज़ल
इश्क़ में ऐ कोहकन क्या ज़ख़्म-ए-सर दरकार थाज़ख़्म-ए-दिल दरकार था ज़ख़्म-ए-जिगर दरकार था
आसी गाज़ीपुरी
शे'र
दश्त-नवर्दी के दौरान 'मुज़फ़्फ़र' सर पर धूप रहीजब से कश्ती में बैठे हैं रोज़ घटाएँ आती हैं
मुज़फ़्फ़र वारसी
शे'र
अदब से सर झुका कर क़ासिद उस के रू-ब-रू जानानिहायत शौक़ से कहना पयाम आहिस्ता आहिस्ता
अज़ीज़ सफ़ीपुरी
शे'र
ये आदाब-ए-मोहब्बत है तिरे क़दमों पे सर रख दूँये तेरी इक अदा है फेर कर मुँह मुस्कुरा देना





