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सूफ़ी उद्धरण
पीर से मुरीद की कोई हालत छिपी नहीं रहती।
पीर से मुरीद की कोई हालत छिपी नहीं रहती।
शाह जी मोहम्मद शेर मियाँ
सूफ़ी उद्धरण
मुरीद को चाहिए कि किसी भी हाल में अपने पीर के रास्ते को न छोड़े।
मुरीद को चाहिए कि किसी भी हाल में अपने पीर के रास्ते को न छोड़े।
शाह जी मोहम्मद शेर मियाँ
सूफ़ी उद्धरण
अगर बंदा बनना चाहते हो, तो ज़िक्र करो। अगर ख़ुदा जैसा बनना चाहते हो, तो फ़िक्र करो।
अगर बंदा बनना चाहते हो, तो ज़िक्र करो। अगर ख़ुदा जैसा बनना चाहते हो, तो फ़िक्र करो।
शाह जी मोहम्मद शेर मियाँ
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सूफ़ी उद्धरण
तसव्वुर (ध्यान) ही असली चीज़ है। तसव्वुर को इतना मज़बूत करना चाहिए कि अपने पीर की सूरत के अलावा कोई सूरत नज़र न आए।
शाह जी मोहम्मद शेर मियाँ
शे'र
औघट शाह वारसी
सूफ़ी उद्धरण
काम को पूरा करने में कभी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। जितना हो सके उतना काम करते रहना चाहिए, क्योंकि काम करने से ही काम निकलता है। और यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि काम करने पर भी कोई नतीजा क्यों नहीं मिला।
शाह जी मोहम्मद शेर मियाँ
फ़ारसी सूफ़ी काव्य
शह-ए-तहारत-ओ-तक़्वा हुज़ूर शाह ज़फ़रब-ग़र्क़-ए-नूर सरापा हुज़ूर शाह ज़फ़र








