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सूफ़ी लेख
हिन्दुस्तानी क़व्वाली के विभिन्न प्रकार
बहुत क़रीब है अ’र्श-ए-ख़ुदा मदीने सेइसी का फ़ैज़ है दुनिया में ये वो चौखट है
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
शैख़ फ़रीदुद्दीन अत्तार और शैख़ सनआँ की कहानी
अन्त में बीमार हो गया। परन्तु उसकी चौखट से अपना सर न उठाया।बूद ख़ाक-ए-कू-ए-आँ बुत बिस्तरश ।
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
जिन नैनन में पी बसे दूजा कौन समाय
जब हम कमरे में पहुँचे तो हमने चौखट पर अपना माथा टेका । हज़रत ने मुझे
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी
ये बड़े लोगों की बड़ी बात थी।हम सबकी दुआ’ तो रहे कि अल्लाह तआ’ला ने हुज़ूर
ख़्वाजा हसन सानी
सूफ़ी लेख
अबुलफजल का वध- श्री चंद्रबली पांडे
जहाँगीर ने यह नहीं लिखा कि किसके द्वारा उसने यह काम कराया पर कवि केशव का
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
जौनपुर की सूफ़ी परंपरा
आप अपने समय के प्रसिद्ध सूफ़ी थे .आप तैमूर के आक्रमण के समय दिल्ली से जौनपुर
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन बख़्तियार काकी - मुल्ला वाहिदी देहलवी
दिल्ली की जामा’ मस्जिद से साढे़ ग्यारह मील जानिब-ए-जनूब मेहरवली एक क़स्बा है जो बिगड़ कर
मुनादी
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हज़रत ख़्वाजा क़ुतुबुद्दीन मुनव्वर निज़ामी
फ़रमान को देखकर हज़रत क़ुतुब मुनव्वर ने कहा कि जिस वक़्त सुल्तान नासिरुद्दीन मुल्तान की तरफ़
मुनादी
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ख़्वाजा मीर दर्द और उनका जीवन
दिल्ली शहर को बाईस ख्व़ाजा की चौखट भी कहा जाता है। इस शहर ने हिन्दुस्तानी तसव्वुफ़
सुमन मिश्र
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ग्रामोफ़ोन क़व्वाली
शंकर-शम्भू दो सगे भाई थे जिनकी युगल क़व्वाली ने दुनिया भर को दीवाना बनाया।उनका जन्म उत्तर
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
हज़रत बाबा साहिब की दरगाह-मौलाना वहीद अहमद मसऊ’द फ़रीदी
क़स्बा की बुलंदी पर एक शहीदी दरवाज़ा है। उस से आगे बढ़कर जो मक़बरा है उसें
मुनादी
सूफ़ी लेख
क़व्वालों के क़िस्से
शंकर शम्भू क़व्वाल का नाम आज कौन नहीं जानता । एक बार शंकर और शम्भू ख्व़ाजा
सुमन मिश्र
सूफ़ी लेख
बहादुर शाह और फूल वालों की सैर
इसी तर्तीब से आगे बढ़ा। दरगाह शरीफ़ क़रीब ही है। थोड़ी देर में वहाँ पहुँच गए।