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सूफ़ी लेख
हज़रत शैख़ फ़ख़्रुद्दीन इ’राक़ी रहमतुल्लाह अ’लैह
कि मरा ख़राब कर्दी तू ब-सज्दः-ए-रियाईचू बराह-ए-का’ब: रफ़्तम ब-हरम रहम न-दादंद
सूफ़ीनामा आर्काइव
सूफ़ी लेख
पदमावत की एक अप्राप्त लोक कथा-सपनावती- श्री अगरचन्द नाहटा
बेचारा राजकुमार मोर दर दर ठोकर खाता फिरने लगा। नौकरी की तलाश में भटकता रहा। एक
सम्मेलन पत्रिका
सूफ़ी लेख
बक़ा-ए-इंसानियत के सिलसिला में सूफ़िया का तरीक़ा-ए-कार- मौलाना जलालुद्दीन अ’ब्दुल मतीन फ़िरंगी महल्ली
बात की इब्तिदा तो अल्लाह या ईश्वर के नाम ही से है जो निहायत मेहरबान और
मुनादी
सूफ़ी लेख
गुरु बाबा नानक जी - अ’ल्लामा सर अ’ब्दुल क़ादिर
“रहम को मस्जिद बना ईमान और सच्चाई की जा-नमाज़ ले,इंसाफ़ को अपनी मुक़द्दस किताब समझ,मीठा चलन
मुनादी
सूफ़ी लेख
बक़ा-ए-इन्सानियत में सूफ़ियों का हिस्सा (हज़रत शाह तुराब अ’ली क़लंदर काकोरवी के हवाला से) - डॉक्टर मसऊ’द अनवर अ’लवी
मुनादी
सूफ़ी लेख
हज़रत शाह वजीहुद्दीन अलवी गुजराती
इसी तरह जब 975 हिज्री में चंगेज़ ख़ान (जो ‘इमाद-उल-मुल्क का लड़का था और ’इमादा-उल-मुल्क उमरा-ए-महमूदी
मआरिफ़
सूफ़ी लेख
पीर-ए-दस्त-गीर हज़रत अब्दुल क़ादिर की करामतों का बयान
नक़्ल है जब ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ अपने पीर-ओ- मुर्शिद के हमराह मक्का मुकर्रमा में पहुँचे आपके
हसरत अजमेरी
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सुल्तान सख़ी सरवर लखदाता-मोहम्मदुद्दीन फ़ौक़
क़स्बा-ए-धोंकल में एक घोड़ी का मशहूर वाक़िआ’वज़ीराबाद (पंजाब) के मुत्तसिल तीन मील के फ़ासला पर एक