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सूफ़ी लेख
चरणदासी सम्प्रदाय का अज्ञात हिन्दी साहित्य - मुनि कान्तिसागर - Ank-1, 1956
अखैराम की बीनती गुरु ईसुर सुचि लेह। बुद्धि सुद्ध सुख धाम कै मोहि रदे सुख देह।।12।।
भारतीय साहित्य पत्रिका
सूफ़ी लेख
निर्गुण कविता की समाप्ति के कारण, श्री प्रभाकर माचवे - Ank-1, 1956
सुख पाहतां जवापाडे। दुःख पर्वताएवढ़े
भारतीय साहित्य पत्रिका
सूफ़ी लेख
खुमाणरासो का रचनाकाल और रचियता- श्री अगरचंद नाहटा
सुण्यां घणी सुख संपजै, सयणां सुभा मंझार।।16।। चोपई
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
संत साहित्य - श्री परशुराम चतुर्वेदी
सुख सनेह अरु भय नहिं जाके,कंचन माटी जानै।।1।।
हिंदुस्तानी पत्रिका
सूफ़ी लेख
खुसरो की हिंदी कविता - बाबू ब्रजरत्नदास, काशी
-आम(38) आवे तो अंधेरी लावे। जावे तो सब सुख लेजावे।।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
खुसरो की हिंदी कविता - बाबू ब्रजरत्नदास, काशी
-आम (38) आवे तो अंधेरी लावे। जावे तो सब सुख लेजावे।।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
पदमावत के कुछ विशेष स्थल- श्री वासुदेवशरण
फूल चुनहिं फर चुरहिं रहस कोड सुख छांह।9पहला अर्थ (प्रशंसापरक)
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
कवि वृन्द के वंशजों की हिन्दी सेवा- मुनि कान्तिसागर - Ank-3, 1956
छंद चर्नाकुलक ब्रह्म सरूप करैं सुख साता गनपति रिद्धि सिद्धि के दाता
भारतीय साहित्य पत्रिका
सूफ़ी लेख
बिहारी-सतसई की प्रतापचंद्रिका टीका - पुरोहित श्री हरिनारायण शर्म्मा, बी. ए.
प्रजापाल सुख जाल भयउ भुवपाल सवाई। श्री जयसिंघ दयाल भाल में अति अधिकाई।।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
महाकवि सूरदासजी- श्रीयुत पंडित रामचंद्र शुक्ल, काशी।
जैसे- सीत उष्ण सुख दुख नहिं मानै, हानि भए कछु सोच न राँचै।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
मीरां के जोगी या जोगिया का मर्म- शंभुसिंह मनोहर
प्रीति किया सुख नांहि, मोरी सजनी, जोगी मित न होय।वे आगे लिखते हैं-
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
सूफ़ी लेख
बिहारी-सतसई-संबंधी साहित्य (बाबू जगन्नाथदास रत्नाकर, बी. ए., काशी)
सतरह सै चालीस दुइ बरषे फागुन मास। एकादंसि तिथि सेत पख बुरहनपुर सुख-बास।।
नागरी प्रचारिणी पत्रिका
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संत कबीर की सगुण भक्ति का स्वरूप- गोवर्धननाथ शुक्ल
सुन्न सरोवर मीन मन, नीर तीर सब देव।सुधा सिंधु सुख विल ही, विरला जानै भेव।।