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सूफ़ी लेख
क़व्वाली का ‘अह्द-ए-ईजाद और मक़्सद-ए-ईजाद
क़व्वाली की ईजाद अमीर ख़ुसरो के ‘अह्द-ए-हयात 1253 ता 1325 के ठीक दरमियान का ‘अह्द है,
अकमल हैदराबादी
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क़व्वाली का अहद-ए-ईजाद और समाजी पस-ए-मंज़र
मूजिद-ए-क़व्वाली हज़रत अमीर ख़ुसरो का ‘अह्द इब्तिदा-ए-इस्लाम और मौजूदा ‘अह्द के ठीक दरमियान का ‘अह्द है
अकमल हैदराबादी
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मूजिद-ए-क़व्वाली
मशाहीर अह्ल-ए-क़लम इस बात पर मुत्तफ़िक़ हैं कि क़व्वाली की तर्ज़ अमीर ख़ुसरो की ईजाद है।
अकमल हैदराबादी
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ज़िक्र-ए-ख़ैर ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़
ख़्वाजा रुकनुद्दीन इश्क़ एक महान सूफ़ी शा’इर हुए हैं। अगर उनकी ज़िंदगी और शाइरी पर नज़र
रय्यान अबुलउलाई
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तसव़्वुफ-ए-इस्लाम
तसव्वुफ़ कुछ इस्लाम के साथ मख़्सूस और उसकी तन्हा ख़ुसूसियत नहीं है।अलबत्ता इस्लामी तसव्वुफ़ में ये
मयकश अकबराबादी
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ख़्वाजा मुई’नुद्दीन चिश्ती की दरगाह
तारीख़ की बा’ज़ अदाऐं अ’क़्ल और मंतिक़ की गिरफ़्त में भी नहीं आतीं। रू-ए-ज़मीन पर ऐसे
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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हज़रत मीराँ जी शम्सुल-उ’श्शाक़
उर्दू ज़बान की सर-परस्ती सब से ज़ियादा सूफ़िया ने की है।इसलिए कि उनका राब्ता अ’वाम और
निसार अहमद फ़ारूक़ी
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शाह नियाज़ बरैलवी ब-हैसिय्यत-ए-एक शाइ’र
अक्सर अहल-ए-कमाल ऐसे होते हैं जिनमें चंद कमालात मुज्तमा’ हो जाते हैं मगर बा’ज़ कमाल इस