परिणाम "फ़ैज़-ए-निगह-ए-लुत्फ़-ओ-करम"
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कीजिए लुत्फ़-ओ-करम ऐ जान-ए-मनता-ब-के-जौर-ओ-सितम ऐ जान-ए-मन
चल जाए जो तीर निगह-ए-नाज़ उधर सेतहसीन की मदद आए लब-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर से
इस तरफ़ भी करम ऐ रश्क-ए-मसीहा करनाकि तुम्हें आता है बीमार का अच्छा करना
उन के अंदाज़-ए-करम उन पे वो आना दिल काहाय वो वक़्त वो बातें वो ज़माना दिल का
कभी फ़ैज़-ए-करम इतना तो मेरे यार हो जाएजो घबराए मेरा दिल आप का दीदार होजाए
करम साक़ी-ए-कौसर जो ब-दस्तूर रहेचश्म-ए-मय-कश में ख़ुमार-ए-मय-ए-मंसूर रहे
कुशादा दस्त-ए-करम जब वो बे-नियाज़ करेनियाज़-मंद न क्यूँ 'आजिज़ी पे नाज़ करे
दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं हैफिर इस में 'अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है
यह क्या राज़ है साक़ी-ए-मस्त-ओ-बे-ख़ुद यह क्यूँ तू ने नज़र-ए-इनायत हटा लीवही मय-कदा है मगर सूना सूना वही जाम-ओ-मीना मगर ख़ाली ख़ाली
सहन-ए-हरम-ओ-कू-ए-सनम छोड़ दिया हैहर दर को तिरे दर की क़सम छोड़ दिया है
मैनूँ तेरे फ़िराक़ ने मार सुटिया, आजा आजा ओ जान-ए-बहार आजाईहनाँ साहवाँ दा नहीं एतबार कोई, तीनों वेख् ते ला इक वार आजा
दिल-ओ-जाँ फ़िदा-ए-तू ऐ कज-कुलाहेनिगाहे सू-ए-सरफ़रोशाँ निगाहे
तिरे करम का सहारा है ज़िंदगी मेरीतिरा करम न हो शामिल तो ज़िंदगी क्या है
अल्लाह रे हौसला निगह-ए-बेक़रार कानज़्ज़ारा और जुम्बिश-ए-मिज़्गान-ए-यार का
ये असीर-ए-रंज-ओ-राहत में असीर-ए-ज़ुल्फ़-ए-जानानाभला क्या समझ सकेगा मुझे ना समझ ज़माना
'अली इमाम-ए-मनस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-'अलीहज़ार जान-ए-गिरामी फ़िदा-ए-नाम-ए-'अली
रश्क-ए-बर्क़-ए-तूर शम्-ए’-महफ़िल-ए-जानाना हैमाह-ए-नौ टूटा हुआ इस बज़्म का पैमाना है
ऐ फ़ित्ना-ए-हर-महफ़िल ऐ महशर-ए-तन्हाईले फिर तिरा नाम आया ले फिर तिरी याद आई
'अली इमाम-ए-मन-अस्त-ओ-मनम ग़ुलाम-ए-’अलीहज़ार जान गिरामी फ़िदा ब-नाम-ए-'अली
असीर-ए-हल्क़ा-ए-गेसू-ए-यार हम भी हैंकिसी के तीर-ए-नज़र के शिकार हम भी हैं
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