आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "farogh e nawa raees ahmad nomani ebooks"
Kalaam के संबंधित परिणाम "farogh e nawa raees ahmad nomani ebooks"
कलाम
न हो क्यूँ मतला'-ए-अनवार-ए-'आलम उस की पेशानीवो पेशानी जो तेरे नक़्श-ए-पा से आश्ना भी है
महशर आरफ़ी
कलाम
नज़र में वादी-ए-ऐमन का नक़्शा फिरने लगता हैशब-ए-’उर्स आज है वतन-ए-चराग़ाँ देखते जाओ
शाह मोहसिन दानापुरी
कलाम
रहूँ कहीं भी फ़क़ीर बन कर मुझे ख़याल-ए-'फ़ना' नहींतिरी निगाह-ए-करम ने मुझ को सदा पयाम-ए-बक़ा दीया
फ़ना बुलंदशहरी
कलाम
ग़रीब दर-दर भटक रहे थे कहीं न हम को सुकूँ मिलाबना के अपना फ़क़ीर मुझ को ग़म-ए-जहाँ से छुड़ा दिया
अज्ञात
कलाम
कब महकेगी फ़स्ल-ए-गुल कब बहकेगा मय-ख़ानाकब सुब्ह-ए-सुख़न होगी कब शाम-ए-नज़र होगी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कलाम
वफ़ा कैसी कहाँ का 'इश्क़ जब सर फोड़ना ठहरातो फिर ऐ संग-दिल तेरा ही संग-ए-आस्ताँ क्यूँ हो
मिर्ज़ा ग़ालिब
कलाम
अब्र है जाम है मीना है मय-ए-गुल-गूँ हैहै सब अस्बाब-ए-तरब साक़ी-ए-गुलफ़ाम नहीं
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
वो तो अल्मास-ए-नगीं हैं या कि हैं दुर्र-ए-यमींकाँच की तू पोत है या रेज़ा-ए-बिल्लौर है
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
कलाम
ख़ानक़ाह-ए-चिश्त में जिस ने क़दम पहला रखादूसरा उस का क़दम फिर अर्श-ए-बाला पर हुआ