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कलाम
महफ़िल-ए-रिंदाँ में जाम मुल का होना चाहिएज़ोहद का क़ुल हो चुका क़ुलक़ुल का होना चाहिए
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
बा'द अज़ फ़ना मज़ार पे आने से फ़ाइदामरने से हम मिटे तो जलाने से फ़ाइदा
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
ख़ुद पर्दा में छुप बैठे हैं और दुनिया को हैरानी हैहैं चारों जानिब ढूँढ रहे मख़्लूक़ हुई दीवानी है
मोहर्रम अली चिश्ती
कलाम
खुल गए ज़ख़्मों के मुँह क्या जाने क्या कहने को हैंक्या नमक-दान-ए-सितम को बे-मज़ा कहने को हैं
ख़्वाजा नासिरुद्दीन चिश्ती
कलाम
दूर जब तक रहे हम बा-दिल-ए-नाशाद रहेपास हम तख़्ता-ए-मश्क़-ए-सितम-ईजाद रहे