आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "muntakhab ul hikayaat molvi nazeer ahamad khan ebooks"
Kalaam के संबंधित परिणाम "muntakhab ul hikayaat molvi nazeer ahamad khan ebooks"
कलाम
कहाँ जाए नज़र और जाए तो जाए किधर हो करवो ख़ुद बैठे हुए हैं हाइल-ए-हद्द-ए-नज़र हो कर
सीमाब अकबराबादी
कलाम
इन्ही ख़ुश-गुमानियों में कहीं जाँ से भी न जाओवो जो चारागर नहीं है उसे ज़ख़्म क्यूँ दिखाओ
अहमद फ़राज़
कलाम
सवाल-ए-बोसा पर क्यूँ झिड़कियाँ देते हो 'अकबर' को'फ़ला-तनहर' कलाम-उल-लाह में अज़ बह्र-ए-साइल है
अकबर लखनवी
कलाम
जला ही देगा तिफ़्ल-ए-अश्क दामान-ए-नज़र अपनाकि इक आतिश का पर काला है ये लख़्त-ए-जिगर अपना
ख़्वाजा अज़ीज़ुल हसन मजज़ूब
कलाम
कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैंबहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे हैं