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कलाम
ख़ुदी के साज़ में है उ'म्र-ए-जावेदाँ का सुराग़ख़ुदी के सोज़ से रौशन हैं उम्मतों के चराग़
अल्लामा इक़बाल
कलाम
ताहिर मुरादाबादी
कलाम
अगर दिल में किसी के याँ जमाल-ए-यार हो पैदालहद में भी यक़ीं है बन के यार अग़्यार हो पैदा
इम्दाद अ'ली उ'ल्वी
कलाम
ता-बके ऐ ना-शगुफ़्ता ग़ुंचे ये मोहर-ए-सुकूतकुछ तो रंग-ए-बे-सबाती पर चमन के खिल के खुल
बाक़िर शाहजहांपुरी
कलाम
राज़-ए-निशात-ए-ख़ुल्द है ख़ंदा-ए-दिल-नवाज़ में'ऐब-ओ-शुहूद के रुमूज़ नर्गिस-ए-नीम-बाज़ में
असग़र गोंडवी
कलाम
एहसान दानिश
कलाम
विलायत में तो हज़रत के नहीं है मुझ को शक हरगिज़व-लेकिन नाज़ अज़ बस था जनाब-ए-शैख़-ए-सनआँ में
सय्यद अली केथ्ली
कलाम
न सुर्मगीं हो तो ऐ तुर्क-ए-चश्म मेरे हुज़ूरलगा न तीर-ए-निगह दिल पे मेरे पहन के शिकस्त
शाह तुराब अली क़लंदर
कलाम
उठते हैं कैसे पर्दा-ए-असरार देख लेइक सूरत-ए-सरमदी की तरफ़ ध्यान लगा के देख