मुबारक हो कि मफ़्हूम-ए-करम समझा गया सेहरा
मुबारक हो कि मफ़्हूम-ए-करम समझा गया सेहरा
मिसाल-ए-अब्र-ए-रहमत ज़िंदगी पर छा गया सेहरा
हर इक मेहमान का दिल झूम उट्ठा चाहत की ख़ुश्बू से
फ़ज़ा-ए-अंजुमन को इस तरह महका गया सेहरा
मुबारक तुझ को ए दूल्हा दुल्हन वालों की ख़ुशनूदी
तिरी ख़ातिर ख़ुशी का नूर ले कर आ गया सेहरा
ख़ुदा रक्खे बहुत ही ख़ुश हैं माँ बाप और बहन भाई
मुबारक हो 'अज़ीज़ों के दिलों को भा गया सेहरा
रह-ए-उल्फ़त में दो दिल जैसे पैमान-ए-वफ़ा बाँधें
सर-ए-नौ-शाह पर इस प्यार से बाँधा गया सेहरा
बहन बहनोई भाई भाबी सब महव-ए-नज़ारा हैं
मक़ाम-ए-शुक्र है सब की नज़र में आ गया सेहरा
फुफी भी ख़ुश फुफा भी ख़ुश हैं ख़ुश हैं ख़ाला ख़ालू भी
ममानी और मामूँ के भी दिल को भा गया सेहरा
दमकता है ख़ुशी के नूर से नौ-शाह का चेहरा
वो देखो चेहरा-ए-नौ-शाह से शर्मा गया सेहरा
बलाएँ लीं जो नौशा की चची ने और अम्माँ ने
तो चाहत की महक से बज़्म को महका गया सेहरा
रहेंगे 'उम्र-भर आपस में दूल्हा और दुल्हन मुख़्लिस
कि पढ़ कर क़ुल-हु-वल्लाहु-अह्द गूँधा गया सेहरा
दु'आएँ क्यूँ न दें दूल्हा को रिश्ता-दार दुल्हन के
कि तक़दीर-ए-’अरूस-ए-ख़ुशनुमा चमका गया सेहरा
'अज़ीज़-ओ-अक़रिबा बाराती और अहल-ए-मोहल्ला को
ख़ुदा के फ़ज़्ल-ओ-रहमत से बहुत ही भा गया सेहरा
मुबारकबाद सब अहबाब दें नौ-शाह को 'अनवर'
ये उस का प्यार है जो प्यार से लिक्खा गया सेहरा
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