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ना'त-ओ-मनक़बत
गुल-ए-गुलज़ार चिश्ती गंज-ए-फ़ैज़ान-ए-फ़रीदुद्दीनअदा-ए-दिलबरी अंदाज़ ख़ूबी जान-ए-महबूबी
अकबर वारसी मेरठी
शे'र
निकल कर ज़ुल्फ़ से पहुँचूँगा क्यूँकर मुसहफ़-ए-रुख़ परअकेला हूँ अँधेरी रात है और दूर मंज़िल है
अकबर वारसी मेरठी
ना'त-ओ-मनक़बत
रंगीन वो रुख़्सार है 'उस्मान-ए-ग़नी काबुलबुल गुल-ए-गुलज़ार है 'उस्मान-ए-ग़नी का
हसन रज़ा बरेलवी
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ग़ज़ल
गुल-बदामाँ गुल सरापा गुल ही गुल है ख़ू-ए-दोस्तबल्कि वो गुल ही नहीं जिस में न हो ख़ुशबू-ए-दोस्त
महमूद आलम
ना'त-ओ-मनक़बत
गुल-ए-बुस्तान-ए-मा'शूक़ी मह-ए-ताबान-ए-महबूबीनिज़ामुद्दीन सुल्तान-उल-मशाइख़ जान-ए-महबूबी
हसरत अजमेरी
ग़ज़ल
फ़स्ल-ए-गुल का ग़म दिल-ए-नाशाद पर बाक़ी रहाहश्र लग ये मुज़लिमा सय्याद पर बाक़ी रहा
सिराज औरंगाबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
गुल 'हसन' तू भी गुल-ए-गुलज़ार बद्र-ए-चिश्त हैक्यूँ न हो तुझ पर निगाह-ए-रहमत-ए-बाबा फ़रीद
अब्दुल सलाम गुल हसन
ना'त-ओ-मनक़बत
मौसम-ए-गुल मौसम-ए-गुलज़ार होना चाहिएहर घड़ी ज़िक्र-ए-शह-ए-अबरार होना चाहिए
शमीम अंजुम वारसी
ना'त-ओ-मनक़बत
हर गुल-ए-तर से 'अयाँ है रंग रू-ए-मुस्तफ़ासूँघिए जिस फूल को आती है बू-ए-मुस्तफ़ा


