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ना'त-ओ-मनक़बत
या हबीब-ए-किब्रिया इर्हम-लना इर्हम-लनाग़रक़-ए-'इस्याँ हूँ शहा उनज़ुर इला 'इस्यानिना
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
सलाम
या हुसैन इब्न-ए-'अली तेरी शहादत को सलामजज़्बा-ए-ईमान को शान-ए-’इबादत को सलाम
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
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ना'त-ओ-मनक़बत
का’बा-ए-’आरिफ़ाँ क़िब्ला-ए-औलियाग़ौस-ए-आ’ज़म बिया ग़ौस-ए-आ’ज़म बिया
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
सरमाया गुनाहों का मिरे पास बहुत हैया-रब मुझे इस बात का एहसास बहुत है
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
तू नूर-ए-रब्बुलल-’आलमीं आफ़ाक़ में शोहरा तिराआईना है कि चाँद है मुसहफ़ है कि चेहरा तिरा
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
मिरे वुजूद को इतना तू मो'तबर कर देसना से अपनी मिरी साँसें तर-ब-तर कर दे
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुर्ग़-ए-दिल का है नशेमन आशियाँ शहबाज़ काछोड़ कर जाएँ कहाँ हम आस्ताँ शहबाज़ का
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
डूबती कश्ती आप तैराएँ बेड़ा पार लगाएँजिस को चाहें वली बनाएँ ख़ुदा के भेद बताएँ
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
क्या लुत्फ़ का मौसम है मोहब्बत की फ़ज़ा हैछाई दर-ए-शहबाज़ पे रहमत की घटा है
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
खुला है दफ़्तर-ए-’इस्याँ ग़ज़ब पर हक़ ता'ला हैख़ुदा और उम्मती के दरमियाँ इक कमली वाला है








