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फ़ारसी सूफ़ी काव्य
बा आरिज़-ए-ज़ेबा-ए-तू मा रा चे जा-ए-बाग़-ओ-गुलबा क़ामत-ए-राना-ए-तू चे जा-ए-सर्व-ओ-नारवन
अमीर ख़ुसरौ
ना'त-ओ-मनक़बत
रहमतों वाले नबी ख़ैर-उल-वरा का तज़्किराकीजिए हर वक़्त महबूब-ए-ख़ुदा का तज़्किरा
अ'ब्दुल सत्तार नियाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
सख़ा-ए-ख़्वाजा-ए-ख़ानून का है तज़्किरा घर-घरकोई ख़ाली नहीं जाता है इस दरबार में आकर
ख़्वाजा नाज़िर निज़ामी
ग़ज़ल
रहा करता है अक्सर तज़्किरा बर्बादी-ए-दिल कामैं बिगड़ा हूँ तो अफ़्साना बना हूँ उन की महफ़िल का
अफ़सर सिद्दीक़ी अमरोहवी
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दोहा
चम्पा तो में तीन गुण रंग-रूप और बास
चम्पा तो में तीन गुण रंग-रूप और बासअवगुण तो में कौन है भँवर न बैठै पास
अज्ञात
ना'त-ओ-मनक़बत
तज़्किरा सुनिए अब उन का दिल-ए-बेदार के साथजिन का ज़िक्र आता है अक्सर शह-ए-अबरार के साथ
पीर नसीरुद्दीन नसीर
क़िता'
ज़ुल्फ़ का ज़िक्र हो या तज़्किरा हो शाने काहोगा 'उन्वान मगर मेरे ही अफ़्साने का
नज़र अ’ज़ीमाबादी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा यूसुफ़ आज़ाद क़व्वाल
इस्माई’ल आज़ाद के हम-अ’स्रों में सबसे ज़्यादा शोहरत यूसुफ़ आज़ाद को नसीब हुई। यूसुफ़ एक इंतिहाई
अकमल हैदराबादी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा इस्माई’ल आज़ाद क़व्वाल
ग्यारहवीं सदी ईसवी से मौजूदा बीसवीं सदी तक क़व्वाली ने कई मंज़िलें तय कीं लेकिन ये
अकमल हैदराबादी
ना'त-ओ-मनक़बत
मुज़्तरिब हूँ कर रहा हूँ तज़्किरा 'अब्बास कानाम लब पर आ रहा है बारहा 'अब्बास का
सक़लैन अहमद जाफ़री
सूफ़ी लेख
तज़्किरा जानी बाबू क़व्वाल
जानी बाबू एक सुरीली, मीठी और पुर-कशिश आवाज़ के मालिक हैं। उनकी तबीअ’त में मूसीक़ी ऐसे
अकमल हैदराबादी
सूफ़ी लेख
तज़्किरा हज़रत मीर सय्यद अली मंझन शत्तारी राजगीरी
हज़रत इमाम हसन के वंश में से एक सूफ़ी हज़रत मीर सय्यद मोहम्मद हसनी बग़दाद से
डॉ. शमीम मुनएमी
सेहरा
मुबारक वालिद-ए-नौशा को रौनक़-ए-बज़्म शादी कीदिखाता है मोहब्बत का असर सेहरा मुबारक हो