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ना'त-ओ-मनक़बत
जो पी ले ज़िंदगी में एक पैमाना मोहम्मद कारहे वो 'उम्र भर वल्लाह मस्ताना मोहम्मद का
अब्र शाह वारसी
ग़ज़ल
ज़िंदगी क्या है जो दिल हो तिश्ना-ए-ज़ौक़-ए-फ़नाया'नी ये पर्दा तो उठ सकता है आसानी के साथ
अख़्तर अलीगढ़ी
सूफ़ी शब्दावली
ना'त-ओ-मनक़बत
बसर हो ज़िंदगी 'इज़्ज़त में तेरी चाहे ज़िल्लत मेंतिरे क़ब्ज़े में बंदे कुछ नहीं है दस्त-ए-क़ुदरत में
उवैस रज़ा अम्बर
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ना'त-ओ-मनक़बत
मसर्रत-केश वो गाम अपनी ज़िंदगी में हैशहंशाह-ए-दो-’आलम के जो ’इश्क़-ओ-आगही में है
मोहम्मद आसिफ़ नूरी
ग़ज़ल
ऐ माह-ए-ख़ुश-रू कह दे अब जो बात हैकि पैमाना-ए-तजस्सुसस-ए-मन मुंतज़िर-ए-ब-इल्तिफ़ात है
अहमद अब्दुल रहमान
ना'त-ओ-मनक़बत
शरी'अत की तुम्हीं से ज़िंदगी है ग़ौस-ए-जीलानीहक़ीक़त की तुम्हीं को आगही है ग़ौस-ए-जीलानी
आरिफ़ नक़्शबंदी
ना'त-ओ-मनक़बत
इस ज़िंदगी में सैकड़ों ग़म थे कड़े कड़ेनासूर-ए-ज़ख़्म दिल में बने थे पड़े पड़े
क़ैसर रत्नागीरवी
ग़ज़ल
कभी पूछा न ऐ साजन जो क्या तुझ पर गुज़रती हैतेरी फ़ुर्क़त से ऐ प्यारे न जीती है न मरती है
मीराँ शाह जालंधरी
ना'त-ओ-मनक़बत
ज़िंदगी का है मज़ा तो आप के दरबार मेंहै ख़ुदा वालों की जन्नत कूचा-ए-दिलदार में
इश्तियाक़ आलम ज़िया शहबाज़ी
ना'त-ओ-मनक़बत
तेरे बग़ैर ज़िंदगी कैसे बसर करेंगे हमतुझ से है ज़िंदगी मेरी तुझ को नज़्र करेंगे हम
डॉ. शाह ख़ुसरौ हुसैनी
कलाम
ताबिश कानपुरी
ना'त-ओ-मनक़बत
ऐ ख़ुशा वो आँख जो दिन-रात देखे रू-ए-शैख़दिल वही दिल है जो हो आशुफ़्ता-ए-गेसू-ए-शैख़

