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शे'र
तू और ज़रा मोहकम कर ले पर्दों की मुकम्मल बंदिश कोऐ दोस्त नज़र की गर्मी को हम आज शरारा करते हैं
अज़ीज़ वारसी देहलवी
फ़ारसी कलाम
'अहमद' बहिश्त-ओ-दोज़ख़ बर 'आशिक़ाँ हराम अस्तईं जा रज़ा-ए-जानाँ रिज़वाँ शुदस्त मारा
अलाउद्दीन अली अहमद साबिर
शे'र
इस आईना-रू के वस्ल में भी मुश्ताक़-ए-बोस-ओ-कनार रहेऐ आ’लम-ए-हैरत तेरे सिवा ये भी न हुआ वो भी न हुआ
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
फ़ारसी कलाम
रूए निकोश मतला-ए’-सुब्ह-ए-सआ'दतस्तसीमा-ए-उस्त शम-ए’-शबिस्तान-ए-औलिया
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
फ़ारसी कलाम
ख़ुदा रा ऐ सबा ब-गुज़र ब-सू-ए-ख़ाकसार-ए-मनब-बर दर कू-ए-आँ जानान: ईं मुश्त-ए-ग़ुबार-ए-मन
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
फ़ारसी कलाम
शब-ए-बख़्त-ए-सियह रा ज़र्रा-ए-मेहरश कुनद सुब्हेफ़रोज़द लम'आ-ए-लुत्फ़श रुख़-ए-शाम-ए-ग़रीबानी
शाह नियाज़ अहमद बरेलवी
फ़ारसी कलाम
ऐ शाफ़े'-ए-तर दामनाँ-ओ-ऐ चारा-ए-दर्द-ए-निहाँजान-ए-दिल-ओ-रूह-ए-रवाँ या'नी शह-ए-'अर्श आस्ताँ
अहमद रज़ा ख़ान
ना'त-ओ-मनक़बत
क़ब्र में हैं आईना-दार-ए-वुफ़ूर-ए-वस्फ़-ए-गुलउन के बुलबुल की ख़मोशी भी लब-ए-इज़हार है
अहमद रज़ा ख़ान
फ़ारसी कलाम
दर दिलम 'अहमद' कि मैल-ए-शाहिद-ओ-साक़ी निहाँस्तपीर गश्तम लेक 'इश्क़-ए-ख़ुद जवाँ दारम हनूज़