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दोहा
यों 'रहीम' सुख दुख सहत बडे लोग सह साँति
यों 'रहीम' सुख दुख सहत बड़े लोग सह साँतिउवत चंद जेहि भाँति सो अथवत ताही भाँति
रहीम
सूफ़ी उद्धरण
क़र्ज़ लेकर पैसा चुकाया जा सकता है, लेकिन हमदर्दी वो क़र्ज़ है जिसे इन्सान कभी नहीं चुका सकता।
क़र्ज़ लेकर पैसा चुकाया जा सकता है, लेकिन हमदर्दी वो क़र्ज़ है जिसे इन्सान कभी नहीं चुका सकता।
अज्ञात
सूफ़ी उद्धरण
पेड़ अपने सर पर गर्मी सह लेता है, लेकिन अपनी छाँव से दूसरों को गर्मी से बचाता है
पेड़ अपने सर पर गर्मी सह लेता है, लेकिन अपनी छाँव से दूसरों को गर्मी से बचाता है
सूफ़ी कहावत
सह चीज़ अस्त कि अगर हक़ीक़त बाशद आंरा इस्तिहक़ार नशायद कर्द. बीमारी ओ वाम ओ दुश्मन
तीन चीज़ों को कमज़ोरी समझना नहीं चाहिए, चाहे वो जितनी ही छोटी लगे: बीमारी, कर्ज़ और दुश्मन।
वाचिक परंपरा
शे'र
हाज़िर है बज़्म-ए-यार में सामान-ए-ऐ’श सबअब किस का इंतिज़ार है 'अकबर' कहाँ हो तुम
शाह अकबर दानापूरी
ग़ज़ल
और ज़िक्र-ए-’ऐश से होता है दूना रंज-ओ-ग़मअब कि अगली सोहबतें ख़्वाब-ए-परेशाँ हो गईं
