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कलाम
कभी लौट आएँ तो पूछना नहीं देखना उन्हें ग़ौर सेजिन्हें रास्ते में ख़बर हुई कि ये रास्ता कोई और है
सलीम कौसर
कलाम
'इश्क़ में जो मंज़िल मिलती है यूँ ही नहीं मिलती 'कौसर'बरसों वीरानों के सरों पर ख़ाक उड़ाई लोगों ने
कौसर आरफ़ी
कलाम
कोई जन्नत का ख़्वाहाँ है कोई कौसर का तालिब हैउड़ा करती है बे-पर की हमेशा बादा-ख़्वारों में
दाग़ देहलवी
कलाम
तसद्दुक़ अ’ली असद
कलाम
ख़ुदा को याद करता हूँ सनम की आश्नाई मेंशराब-ए-शौक़ पीता हूँ मैं अपनी पारसाई में
शाह सिद्दीक़ सौदागर
कलाम
स्वामी रामतीर्थ
कलाम
रूप बदला है कि ढाई है क़ियामत तू नेलोग कहते हैं नज़र आता है जो ख़्वाबों में नहीं
अब्दुल हादी काविश
कलाम
अगर ये रेख़्ता सय्यद कोई मशहद में ले जाएतयक़्क़ुन है कि शौहरत-याफ़्ता हो मुल्क-ए-ईराँ में
सय्यद अली केथ्ली
कलाम
कोई बात ऐसी अगर हुई कि तुम्हारे जी को बुरी लगीतो बयाँ से पहले ही भूलना तुम्हें याद हो कि न याद हो
मोमिन ख़ाँ मोमिन
कलाम
न किसी चीज़ में दिल उन का लगा मेरे बा'दयाद आती ही रही मेरी वफ़ा मेरे बा'द
मौलाना अब्दुल क़दीर सिद्दीक़ी
कलाम
ये न सोचो कि कहाँ है मिरे 'आशिक़ का मज़ारपहले देखो कि ये तुर्बत तह-ए-पा किस की है