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कलाम
क़ुर्बान-ए-फ़ना एक तजल्ली-ए-तेरी होएज़ुल्मत-कदा-ए-हस्तती-ए-मौहूम से निकले
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
'सौदा-गर' हाल-ए-मिर्ज़ा पाकर ये कह रहा हैहै ज़ात कंज़-ए-मख़्फ़ी ज़ात-ए-बक़ा-ए-मिर्ज़ा
शाह सिद्दीक़ सौदागर
कलाम
नसीम-ए-सुब्ह गुलशन में गुलों से खेलती होगीकिसी की आख़िरी हिचकी किसी की दिल लगी होगी
सीमाब अकबराबादी
कलाम
ढूँढ उस जगह किशवर-ए-’अली बाब-ए-’इल्म है’उक़्दा वहीं से होवे है हल मुश्किलात का
मिर्ज़ा मोहम्मद अली फ़िदवी
कलाम
पड़ गई क्या लूट यारब गुलशन-ए-ईजाद मेंदस्त-ए-गुल-चीं में है गुल बुलबुल कफ़-ए-सैय्याद में
अमीर मीनाई
कलाम
नमूना है तिरा रू-ए-दिल-आरा साफ़ गुलशन काहै नर्गिस-आँख 'आरिज़-ए-गुल दहन-ग़ुन्चा है सोसन का
क़ाज़ी उमराव अली जमाली
कलाम
हरम में जल्वा-अफ़्ज़ाई है शान-ए-दिलरुबाई मेंतजल्ली हिन्द में देते हैं वो हुस्न-ए-बुताँ हो कर
तसद्दुक़ अ’ली असद
कलाम
क्या कहूँ पीर-ए-मुग़ाँ का दोस्तो लुत्फ़-ओ-करमअपने मस्तों के लिए उस की 'अता कुछ और है